मौत की दहलीज पर खड़े होकर बेटी की विदाई की फिक्र...धरती के 'फरिश्तों' ने पूरा कर दिया बाप का अरमान

मौत की दहलीज पर खड़े होकर बेटी की विदाई की फिक्र...धरती के 'फरिश्तों' ने पूरा कर दिया बाप का अरमान

सिरसौली के कैंसर पीड़ित होरीलाल को मौत से ज्यादा अपनी बेटी के हाथ पीले करने की थी चिंता

किसान नेता राजेश सक्सेना ने की पहल, अब समाज की मदद से बृहस्पतिवार को धूमधाम से होगी बेटी की शादी

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बदायूं। एक तरफ जिस्म को भीतर से कुतरता कैंसर और दूसरी तरफ बेटी के हाथ पीले करने की चिंता। ये बदकिस्मत बाप तो दोहरी मौत मर रहा था। घर की टूटी फूटी चारपाई पर लेटे हुए इस बाप को कैंसर से ज्यादा तकलीफ अब तक इस बात की थी कि उसकी चिता की आग कहीं उसकी बेटी के अरमानों को भी न राख कर दे। 

ऐसे में जब शरीर दगा दे गया, गरीबी ने उम्मीद के सारे दरवाजे बंद कर दिए, तब कुछ नेक लोगों ने आगे बढ़कर उस लाचार बाप की कलाई थाम ली। उन्होंने उसकी बेटी को ससुराल भेजने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली, जिसे उठाने की ताकत अब उस बाप के जर्जर शरीर में नहीं बची थी। उन फरिश्तों ने यह ठान लिया कि मौत भले ही पिता को छीन ले, पर उस बेटी की मांग का सिंदूर और हाथों की चूड़ियां वक्त की बेरहमी का शिकार नहीं होंगी। 

ये बदकिस्मत बाप है उझानी क्षेत्र के गांव सिरसौली निवासी करीब 55 वर्षीय होरीलाल, जो कैंसर से पीड़ित हैं। घर की हालत अच्छी नहीं है। मुफलिसी में अब तक का जीवन काट दिया, लेकिन वज्रपात तब हुआ जब करीब दो साल पहले पता चला कि पेट में कैंसर अपने पांव पसार चुका है। कैंसर का महंगा इलाज बस के बाहर थालेकिन फिर भी जैसे तैसे कराते रहे, पर लास्ट स्टेज तक पहुंच चुके कैंसर के कारण डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया। मौत किस घड़ी दस्तक दे दे, पता नहीं। ऐसे में होरीलाल बिस्तर पर पड़े रहकर हर वक्त मौत की आहट सुनते हैं लेकिन अपनी जिंदगी जाने से ज्यादा चिंता उन्हें अपनी बेटी के हाथ पीले करने की रहती है। 

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तीन की हो चुकी शादी, एक अविवाहित

बदायूं। होरीलाल के परिवार में पत्नी के अलावा चार बेटियां हैं। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। चौथी बेटी बानो की शादी की चिंता ने होरीलाल को अंदर ही अंदर और ज्यादा खोखला कर रखा था। कच्चे मकान की मिट्टी से बनी चाहरदीवारी के भीतर उनकी इस चिंता को न तो समझने वाला कोई था और न ही दूर करने वाला। ऐसे में किसान नेता राजेश सक्सेना आगे आए और बानो की शादी की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने मदद के लिए और लोगों से भी अपील की, जिससे गांव के लोगों समेत अन्य कई लोग मदद के लिए आगे आ गए और बानो की शादी की तारीख सात मई तय हो गई। 

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बृहस्पतिवार को गांव में सजेगा पंडाल

बदायूं। किसान नेता राजेश सक्सेना के अनुसार, शादी में मेहमानों के खाने की व्यवस्था वह खुद कर रहे हैं जबकि पंडाल की जिम्मेदारी रमेश चंद्र फौजी ने ली है। इसके अलावा अन्य लोगों ने भी अपने अनुसार मदद की है। बेटी को उपहार में घरेलू सामान भी जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को गांव में भव्य पंडाल लगाकर बेटी की शादी कराई जाएगी। 

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किसान नेता का पैतृक गांव है सिरसौली

बदायूं। सिरसौली किसान नेता राजेश सक्सेना का पैतृक गांव है। उन्होंने बताया कि कैंसर पीड़ित तथा बेटी के हाथ पीले होने की चिंता जब उन्हें पता चली तो उन्होंने सामूहिक मदद के द्वारा यह काम करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने बताया कि शादी में जिले की जानी मानी हस्तियां व राजनीतिक लोग भी शमिल होंगे। 


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  • user by श्रीकांत यादव

    दल बदलू नेता हैं ये, किसी का भला नहीं कर सकते हैं ये। टिकट का सपना देख रहे हैं कई नेता पर टिकट नहीं मिलेगा। आबिद रजा काजी रिजवान शैलेश पाठक, विमल कृष्ण सब ताकते रह जाएंगे

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  • user by Suresh sharma

    ड्रामेबाज महिलाएं है

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