नजर नहीं आ रहा या छिपाया जा रहा...कौन है दो लोगों की जान लेने वाले हत्यारे का 'राजनीतिक आका'!

नजर नहीं आ रहा या छिपाया जा रहा...कौन है दो लोगों की जान लेने वाले हत्यारे का 'राजनीतिक आका'!

14 जनवरी को डीएम को लेटर देकर सुधीर गुप्ता ने जताई थी खतरे की आशंका, डीएम ने एसडीएम और सीओ को किया था मार्क

फिर भी खाकी ने नहीं दिया ध्यान, दरोगा के साथ पार्टी करता रहा हत्यारा अजय प्रताप

सबकी बात न्यूज

बदायूं। हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) सीबीजी प्लांट के उपमहाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या करने वाला अजय प्रताप सिंह भले ही पुलिस गिरफ्त में हो, लेकिन दबी जुबान लोग यह कह रहे हैं कि भले ही हत्या उसने की हो, लेकिन इसका मास्टरमाइंड कोई और है। उसके राजनीतिक आका के रूप में सत्ताधारी पार्टी के एक नेता का नाम भी आ रहा है। 

बृहस्पतिवार 12 मार्च को एचपीसीएल सीबीजी प्लांट के डीजीएम सुधीर गुप्ता और एजीएम हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारा अजय प्रताप इसी प्लांट का पूर्व वेंडर था, जिसे नौकरी से निकाल दिया गया था। पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे हर्षित के परिवार वालों ने खुलकर आरोप लगाया कि उनके बेटे को लगातार धमकी मिल रही थी। मां रीना मिश्रा ने कहा कि हर्षित ने  पुलिस से शिकायत की थी। विधायक के पास भी गया था लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। उन्होंने खुलकर कहा कि सब ठाकुर हैं और सभी ने उनके बेटे को मिलकर मारा है। उन्होंने प्लांट के सीजीएम राजीव सिंह समेत कुछ अन्य लोगों के नाम लेते हुए उन पर भी आरोप लगाए। 

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शरीर पर निशान दिखाकर डराया था, बोला था- 'गैंगस्टर गिरोह से जुड़ा है'

बदायूं। इस मामले में सुनील गुप्ता ने 14 जनवरी को डीएम को एक लेटर दिया था, जिसमें उन्होंने साफ लिखा था कि 13 जनवरी को अजय प्रताप सिंह प्लांट में आया था और कॉन्फ्रेंस रूम में घुसकर एचपीसीएल के अधिकारियों को धमकी दी और कहा कि वह उन्हें सबक सिखाएंगे। अजय ने यह भी कहा था कि वह नोएडा के एक गैंगस्टर गिरोह से जुड़ा हुआ है और कई सालों तक उनके लिए काम किया है। यह भी कहा कि वह शाहजहांपुर के एक गैंगस्टर गिरोह का हिस्सा हैं। उसने अपने शरीर पर कई निशान दिखाकर अधिकारियों में दहशत पैदा करने का काम किया था। लेटर में सुधीर गुप्ता ने लिखा था कि उसी दिन शाम को अजय प्रताप ने उन्हें सैजनी चौराहे पर रोककर धमकी दी थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि यदि भविष्य में एचपीसीएल के किसी भी अधिकारी या स्टाफ को जानमाल का नुकसान होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अजय प्रताप सिंह और उनके सहयोगियों की होगी। 

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डीएम ने एसडीएम और सीओ को लिखा था कार्रवाई के लिए 

बदायूं। सुधीर गुप्ता के पत्र पर पर डीएम ने एसडीएम और सीओ दातागंज को मार्क करते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा था लेकिन किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा दो लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। 

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पुंलिस सोती रही...हत्यारा, दरोगा के साथ करता रहा पार्टी

बदायूं। बताया जा रहा है कि हत्यारे अजय प्रताप के साथ थाना पुलिस का अच्छा उठना बैठना था। अक्सर वह थाने में बैठता था। दरोगा धर्मेंद्र के साथ उसके खास संबंध बताए जाते हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि कुछ समय पहले धर्मेंद्र के बेटे की बर्थडे पार्टी में बिसौली रोड स्थित एक होटल में भी अजय प्रताप मौजूद था। यहां उन्होंने मिलकर जश्न मनाया था। 

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कई सवाल, जिनके तलाशने होंगे जवाब

बदायूं। डबल मर्डर के बाद कई सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब जनता चाहती हैं। आइये आप भी जानिये क्या हैं वो सवाल-

सवाल नंबर-1 

- यह कहा जा रहा है कि हत्या से पहले अजयप्रताप ने प्लांट की एक गाड़ी हो हाईजैक किया था और उसी गाड़ी से वह प्लांट में घुसा था। प्लांट की गाड़ी देखकर उसे गेट पर सुरक्षा गार्ड्स ने नहीं रोका था। तो क्या गेट पर सुरक्षा गार्ड्स ने केवल गाड़ी देखकर उसे अंदर जाने दिया। क्या यह नहीं देखा गया कि उसे कौन चला रहा था। अमूमन किसी भी फैक्ट्री का गेट खोलते समय सबसे पहले गाड़ी पर और उसके बाद ड्राइवर पर ही गार्ड की नजर पड़ती है। बाकायदा रजिस्टर में आगंतुक का नाम, पता और आने का कारण दर्ज किया जाता है, किन ऐसा क्यों नहीं किया गया। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अजय प्रताप गाड़ी में छिपकर आया था तो गाड़ी में मौजूद और लोग कौन थे। हालांकि जिस दबंगई से उसने हत्या की, उससे छिपकर आने की बात भी हजम नहीं होती।

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सवाल नंबर-2

- हत्या के बाद जिले के बड़े पुलिस अधिकारी यह कह रहे हैं कि किसी ने उनसे सुरक्षा की मांग नहीं की थी जबकि 14 जनवरी को डीएम को दिए पत्र में उन्होंने एसडीएम और सीओ दातागंज को मार्क किया है। ऐसे में क्यों पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं  दिया। कहीं पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में  थी?

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सवाल नंबर-3

- हत्यारा अजय प्रताप की दबंगई की बाबत पूरे क्षेत्र को पता है। वह किसका खास था, पुलिस में उसकी कितनी पैठ थी, किसके कहने पर वह काम करता था, इसकी दबी जुबान कुछ लोग चर्चा कर ही रहे हैं। नौकरी से निकालने पर उसने केवल सुधीर गुप्ता और हर्षित मिश्रा को ही निशाना क्यों बनाया, जबकि वह संविदा कर्मचारी था और उसे संबंधित एजेंसी द्वारा ही निकाला गया होगा। लोगों में यह भी चर्चा है कि मारे गए दोनों अधिकारी काम के आगे किसी नेता की नहीं  सुनते थे। यहां तक कि सत्ताधारी नेता को भी उन्होंने नजरअंदाज कर दिया था। चूंकि हत्यारा इस सत्ताधारी नेता का करीबी बताया जा रहा है तो कहीं ऐसा तो नहीं है कि अजय प्रताप केवल मोहरा हो, जबकि असली खिलाड़ी कोई और हो। यदि यह बात सही है तो कौन हो सकता है, दो हत्याओं का मास्टरमाइंड...?

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हत्या की मुख्य खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

- बदायूं के एचपीसीएल प्लांट में घुसकर चलाईं ताबड़तोड़ गोलियां, प्रबंधक समेत दो की हत्या

https://sabkibaat.in/post/they-entered-the-hpcl-plant-in-badaun-and-opened-fire-killing-two-including-the-manager-




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    ऐसे लोगो को सख्त सज़ा मिलनी चाहिए

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