दो बहनों के इकलौते भाई थे जगसीर, 10 साल के बेटे के सिर से छिना पिता का साया
सबकी बात न्यूज। पंजाब के बरनाला जिले के गांव ठुल्लीवाल में जन्मे सिख रेजिमेंट मदर यूनिट 27 के नायक 35 वर्षीय जगसीर सिंह पुत्र सुखदेव सिंह श्रीनगर के बड़गाम जिले में ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए।
उनके बलिदान होने की खबर मिलते ही ठुल्लीवाल गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। समाजसेवी हरतेज सिंह सिद्धू ने बताया कि शहीद जगसीर एक किसान परिवार से थे और दो बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी शादी 2015 में गांव लौगवाल निवासी सरबजीत कौर से हुई थी। उनके परिवार में पत्नी सरबजीत कौर और 10 साल का बेटा जबरफतेह सिंह हैं। जगसीर को मार्च 2026 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी। उनकी शहादत कैसे हुई, अभी इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है।
उनका पार्थिव शरीर बुधवार पांच नवंबर को सुबह करीब नौ बजे गांव पहुंचेगा। इसके बाद सुबह साढ़े दस बजे शक्षा सरकारी सीनियर स्कूल के खेल मैदान में सेना की टुकड़ी द्वारा सलामी के बाद सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांववासियों और परिवार के सदस्यों ने मांग की कि शहीद की पत्नी सरबजीत कौर को सरकारी नौकरी और सभी सरकारी लाभ दिए जाएं। इस अवसर पर सांसद गुरमीत सिंह मीत, विधायक कुलवंत सिंह पंडोरी, विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लो, समाजसेवी हरतेज सिंह सिद्धू, ब्लॉक अध्यक्ष परमिंदर सिंह सम्मी ठुल्लीवाल, पूर्व चेयरमैन करनैल सिंह ठुल्लीवाल, आप ब्लॉक अध्यक्ष हरप्रीत सिंह ठुल्लीवाल, एसएचओ गुरपाल सिंह, एएसआई जसविंदर सिंह सहित कई अन्य नेताओं और प्रमुख हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया और शहीद के परिवार के साथ सहानुभूति व्यक्त की।
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मार्च-2011 में भर्ती हुए थे सेना में
सबकी बात न्यूज। गांव के समाजसेवी हरतेज सिंह सिद्धू, शहीद कुलदीप सिंह के बहनोई, मामा के बेटे परमिंदर सिंह और मौसी के बेटे सुखदीप सिंह ने बताया कि नायक जगसीर सिंह ने 12वीं तक की शिक्षा सरकारी सीनियर स्कूल ठुल्लीवाल से प्राप्त की थी। इसके बाद वे 24 मार्च 2011 को पटियाला में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। रांची (रामगढ़) में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, 2012 में उनकी पहली ड्यूटी कपूरथला जिले में थी। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर, अमृतसर और उत्तराखंड सहित कई जगहों पर अपनी सेवाएं दीं। हाल ही में उनकी तैनाती श्रीनगर के बडगाम में हुई थी, जहां तीन नवंबर की शाम करीब पांच बजे ड्यूटी के दौरान वे बलिदान हो गए।
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