पीएसी बटालियन के भवन पर तैनात रिटायर्ड फौजी को भी जान से मारने की मिली थी धमकी, तब भी नहीं चेती थी पुलिस

पीएसी बटालियन के भवन पर तैनात रिटायर्ड फौजी को भी जान से मारने की मिली थी धमकी, तब भी नहीं चेती थी पुलिस

हत्यारोपित अजय प्रताप के तहेरे भाई अभयप्रताप समेत दो नामजद व 15 अज्ञात पर दर्ज हुआ था मुकदमा

एफआईआर के बाद भी धमकाते रहे आरोपित, डर के कारण बटालियन के आवासीय भवन पर तैनात सुरक्षा गार्ड छोड़कर चले गए थे नौकरी

सबकी बात न्यूज

बदायूं। एचपीसीएल में हुआ दोहरे हत्याकांड में मारे गए सुधीर गुप्ता और हर्षित मिश्रा कोई पहले व्यक्ति नहीं थे जो आरोपित अजय प्रताप और उसके दबंग परिवार वालों की धमकी का शिकार हुए थे।

इससे पहले उसके तहेरे भाई अभय प्रताप ने भी पीएसी बटालियन के आवासीय भवन निर्माण स्थल पर तैनात सुरक्षा गार्ड रिटायर्ड फौजी जगबरन यादव को भी जमकर पीटा था और जान से मारने की धमकी दी थी। इस मामले में अभय प्रताप समेत दो नामजद और 15 अज्ञात के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया था, लेकिन तब भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मजबूरन सुरक्षा गार्ड को जान बचाने के लिए नौकरी छोड़कर जाना पड़ गया। 

एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड की गूंज इस समय पूरे प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश भर में है। हत्यारोपित अजय प्रताप को भले ही पुलिस ने मुठभेड़ दर्शाकर गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन यह पहला मामला नहीं है जब उसने या उसके परिवार वालों ने दोनों अधिकारियों को धमकाया हो। इससे पहले भी दबंगई के कई मामलों को पुलिस दबा चुकी थी। 

जिला सुल्तानपुर के टंडरसा पंड्रे अटौला निवासी जगबरन यादव रिटायर्ड फौजी हैं। पिछले साल वह यूनिक इंफ्रा इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरफ से पीएसी बटालियन के आवासीय निर्माण स्थल पर सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे। उन्होंने 13 मार्च को एक एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि निर्माण स्थल पर अभय प्रताप सिंह ईंट सप्लायर है। वह समय-समय पर ईंटों की आपूर्ति करता रहा है, जिसका कंपनी ने पूरा भुगतान किया है। कुछ समय पहले अभय को कंपनी ने पानी का एक टैंकर समेत कुछ अन्य सामग्री उधार दी थी। आरोप था कि जब उन्होंने अभय से यह सामान वापस मांगा तो वह आनाकानी करने लगा। ज्यादा कहने पर जान से मारने की धमकी दी। 10 मार्च-25 को अभय 15-20 लोगों के साथ निर्माण स्थल पर आ गया और उनके तथा उनके स्टाफ के साथ गालीगलौज करने लगा। उन लोगों ने जब विरोध किया जो आरोपितों ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें बेरहमी से पीटा। पुलिस को बताने पर जान से मारने की धमकी देते हुए वह वहां से चले गए। 

जगबरन यादव के अनुसार, इस मामले में उन्होंने अभयप्रताप सिंह, राजा सिंह, आशीष सिंह समेत 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ यह कहते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी जान को खतरा है, लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने आरोपितों पर कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा आरोपित उन्हें समय समय पर जान से मारने की धमकी देने लेगे। जान बचाने की खातिर वह नौकरी छोड़कर वहां से चले गए। जगबरन के अनुसार, पुलिस के ढीले रवैये के कारण ही आरोपितों के परिवार के हौसले बुलंद हो गए, जिस कारण ये दोहरा हत्याकांड हुआ। 

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समय पर होती कार्रवाई तो बच सकती थी दोनों की जान

बदायूं। इस मामले में शुरू से ही थाना पुलिस और अधिकारियों का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। जगबरन के अनुसार, दरोगा से लेकर सीओ और एसएसपी तक ने कोई कार्रवाई नहीं की। यदि आरोपितों पर समय रहते कानून की लगाम लग जाती तो शायद दो लोगों को जान बच जाती। 

(मुख्य फोटो- फाइल)

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    दल बदलू नेता हैं ये, किसी का भला नहीं कर सकते हैं ये। टिकट का सपना देख रहे हैं कई नेता पर टिकट नहीं मिलेगा। आबिद रजा काजी रिजवान शैलेश पाठक, विमल कृष्ण सब ताकते रह जाएंगे

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    ड्रामेबाज महिलाएं है

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