सपाः रूठे होते तो मना लेते.....पर यहां कहानी 'बगावत' की है

सपाः रूठे होते तो मना लेते.....पर यहां कहानी 'बगावत' की है

खास बातें- 

- शिवपाल ने कहा- 'जो नाराज हैं उन्हें घर जाकर मना लेंगे'

- सेक्युलर महापंचायत में सलीम व आबिद पहले ही दिखा चुके हैं बगावती रुख

- चाचा की राह नहीं होगी आसान, भतीजे धर्मेंद्र के समर्थक भी मन से नहीं साथ

- रिलीज होने से पहले ही सपा की फिल्म 'फ्लाॅप' होने की बात कर रहे राजनीतिक जानकार

सब की बात न्यूज

बदायूं। लोकसभा चुनाव का टिकट घोषित होने के बाद पहली बार बदायूं पहुंचे सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने पूर्व सांसद सलीम शेरवानी और पूर्व मंत्री आबिद रजा की नाराजगी पर यह कह तो दिया कि जो नाराज हैं उन्हें घर जाकर मना लेंगे, लेकिन यह आसान नहीं होगा। हालांकि राजनीति में कुछ भी हो सकता है लेकिन इसके चांस कम ही नजर आ रहे हैं क्योंकि यहां बात नाराजगी की नहीं बल्कि बगावत की है। 

पूर्व सांसद सलीम शेरवानी और पूर्व मंत्री आबिद रजा ने सहसवान में सेक्युलर महापंचायत करके पहले ही इसके संकेत दे दिये थे कि वे बागी हो चुके हैं और बागियों को मनाना आसान नहीं होगा। अब आबिद रजा "जनता की चौपाल" के माध्यम से लोगों से सीधा संवाद कायम करने का प्रयास कर रहे हैं जो सपा को कहीं न कहीं मुश्किल में ही लाकर खड़ा करेगा। इधर, शिवपाल सिंह को सपा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद उनके अब तक बदायूं न आने के कारण धर्मेंद्र यादव समर्थकों का गुट यह मानने लगा था कि धर्मेंद्र का टिकट हो सकता है लेकिन बृहस्पतिवार को शिवपाल के बदायूं पहुंचने के बाद इन अटकलों पर भी फिलहाल विराम लग गया। ऐसे में यह माना जा रहा है कि धर्मेंद्र समर्थकों का यह गुट शिवपाल खेमे को चुनाव में कहीं न कहीं प्रभावित करने की कोशिश जरूर करेगा। ऐसे में शिवपाल की राह यहां आसान नहीं होने वाली। 

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...मुसलमानों ने ही बिगाड़ दिया था सपा का गणित

बदायूं। बदायूं सीट की बात करें तो सपा का गढ़ मानी जाने वाली यह सीट पिछले चुनाव में भाजपा ने भले ही सपा से छीन ली हो लेकिन साल 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बाद भी भाजपा को यहां से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि 2019 का चुनाव सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यहां से हार गए। राजनीतिक जानकारों की मानें तो बदायूं सीट पर पिछले चुनाव में मुसलमानों ने ही सपा का चुनावी गणित बिगाड़ दिया था। दरअसल, यहां यादव और मुस्लिमों का वोट खासी संख्या में है। माना जा रहा है कि शिवपाल को बदायूं सीट से प्रत्याशी बनाकर सपा ने यादवों को तो साध लिया है लेकिन शेरवानी और आबिद की बगावत के बाद मुसलमानों को साधना सहज नहीं होगा। 

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पहले सेक्युलर महापंचायत, अब ‘‘जनता की चौपाल‘‘ 

बदायूं। सहसवान में सेक्युलर महापंचायत करने के बाद अब पूर्व मंत्री आबिद रजा ने जनता के बीच जाकर ‘‘जनता की चौपाल‘‘ के माध्यम से सीधा संवाद शुरू कर दिया है। इसे सीधे सपा का विरोध माना जा रहा है। आबिद और सलीम सपा से इस्तीफा तो दे ही चुके हैं, ऐसे में यह सपा के खिलाफ अभियान की शुरुआत मानी जा रही है। बृहस्पतिवार को उन्होंने नई सराय, शहवाजपुर. हकीमगंज, वेदोटोला, जामा मस्जिद, खण्डसारी, जोगीपुरा, कटराब्रह्ममपुर में जनता की चौपाल लगाकर इस बात के संकेत दे दिए हैं कि वह भी चुनाव में उतरने जा रहे हैं। हालांकि आबिद सीधे तौर पर अभी चुनाव लड़ने की बात नहीं कह रहे हैं। उन्होंने यह बयान भी जारी किया है कि मुसलमान सपा में घुटन महसूस कर रहा है। मुसलमान की सपा में कद्र और अहमियत बहुत कम हो गई है। सपा में मजबूत मुसलमान लीडर को जानबूझ कर कमजोर किया जा रहा है।

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दूसरे नेताओं के लिए कही यह बात

बदायूं। आबिद रजा ने केवल सपा में मुसलमानों की घुटन की बात नहीं कही है बल्कि कुछ दूसरे मुसलमान नेताओं पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि बदायूं में अब उन्ही फर्जी मुस्लिम नेताओ की ज्यादा इज्जत है जो पैसा लेकर चुनाव लड़ाने के लिए जनता में मशहूर हो चुके है। ये चुनाव में कौम का सौदा करते है। आने वाली नस्ले ऐसे लोगो को माफ नहीं करेंगी। 


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  • user by संजीव

    इसे भी ईंट से खींचकर मारो जान से

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  • user by Mala

    Good reporting

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  • user by सुधाकर सिंह नोएडा

    रिपोर्टिंग ये होती है। जिन पर रिपोर्ट लिखी उनके नाम तक नहीं दिए। जरूरी नहीं कि महिला ही पीड़ित हो। कभी कभी लड़का पक्ष भी सही होता है। इसका ध्यान रखना बहुत अच्छी बात है। आखिर लड़के पक्ष की भी इज्जत होती है। शाबाश सबकी बात न्यूज

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