चन्दौसी गणेश चौथ के प्रसिद्ध मेले में...'टिप-टिप बरसा पानी', आस्था और भक्ति की ये कैसी कहानी!
बीते सोमवार की रात मेला गणेश चौथ में फिल्मी गानों पर फूहड़ अंदाज पर हुआ नृत्य, कई लोगों ने की आलोचना
डांस प्रतियोगिता के नाम पर कराया गया आयोजन, निर्णायक मंडल पर भी लगे पक्षपात के आरोप
चन्दौसी (सम्भल)। चन्दौसी का मेला गणेश चौथ केवल आसपास के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि दूरदराज के जिलों में भी खासा महत्व रखता है। अनंत चतुर्दशी के मौके पर करीब एक माह तक यहां आस्था और भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। पर आस्था और भक्ति के इस मौके पर बीती रात यहां स्टेज पर ऐसे नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसे भक्ति से जुड़े मंच पर फूहड़ ही कहा जाएगा। नृत्य प्रतियोगिता के नाम पर किए गए इस आयोजन में प्रतिभागियों के साथ पक्षपात की भी आवाजें उठीं।
सम्भल जिले की तहसील चन्दौसी गणेश चौथ मेले के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहां लगा मेला करीब एक माह तक चलता है। गणेश शोभायात्रा देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ यहां जुटती है। बीते सोमवार की रात यहां कुछ आयोजकों ने स्टेज पर एक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन कराया, लेकिन लोगों का कहना है कि वहां भक्ति गीतों के स्थान पर फिल्मी गीतों पर फूहड़ अंदाज में नृत्य कराया गया जो आस्था के इस मेले के हिसाब से किसी भी दशा में सही नहीं कहा जा सकता। कई लोग सोशल मीडिया पर भी इसकी आलोचना कर रहे हैं।
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निर्णायक मंडल पर गलत निर्णय देने का आरोप
चन्दौसी (सम्भल)। मेला गणेश चौथ के रंगमंच पर आयोजित इस नृत्य कार्यक्रम में मुंबई समेत कई शहरों से निर्णायकों को बुलाया गया। देर रात तक कार्यक्रम चलता रहा। लोगों का आरोप है कि जब निर्णय का समय आया तो निर्णायक मंडल में शामिल एक निर्णायक ने अपने चहेतों के पक्ष में निर्णय कर दिया, जबकि निणार्यक मंडल के अन्य निर्णायक तक उनके विरुद्ध थे। आरोप है कि इस सदस्य ने अपनी
एकेडमी के बच्चों को विनर के तौर पर घोषित कर दिया। चर्चा है कि इस बात को लेकर मंडल मे शामिल अन्य निर्णायकों से उनकी बहस भी हुई। इसकी मेले में देर रात तक चर्चा चलती रही, वहीं मंगलवार को सोशल मीडिया पर निर्णायक के निर्णय की आलोचनाओं का सिलसिला चलता रहा। लोगों का यह भी कहना था कि कई प्रतिभागियों के नृत्य में जमकर फूहड़ता का प्रदर्शन भी किया गया। उन प्रतिभागियों को नजरअंदाज कर दिया गया जो सम्मान के असली हकदार थे।
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