सपा की जिला कमेटी समेत सभी फ्रंटल संगठनों की कमेटियां भंग...बचे केवल जिलाध्यक्ष
बदायूं। भाजपा की तरह जिले में गुटबाजी का शिकार हो चुकी समाजवादी पार्टी में भी 'ओवरहॉलिंग' शुरू हो चुकी है। फर्क इस बात का है कि इस बार पूरे प्रदेश की ओवरहॉलिंग एक साथ नहीं, बल्कि जिलेवार की जा रही है। इस बार नंबर बदायूं जिले का लगा है। इसके तहत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने जिला कमेटी समेत पार्टी के सभी फ्रंटल संगठनों की कमेटियों को तत्काल प्रभाव से तोड़ दिया यानी भंग कर दिया है।
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ये है प्रदेश अध्यक्ष का फरमान
बदायूं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के लेटर पैड पर जारी आदेश में कहा गया है कि बदायूं के जिलाध्यक्ष आशीष यादव को छोड़कर जिला कमेटी के सभी पदाधिकारी व सदस्य सभी फ्रंटल संगठनों के जिलाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी तथा बदायूं के सभी राज्य कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारी व सभी फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कमेटी के पदाधिकारियों को उनके दायित्वों से हटा दिया गया है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि ऐसा करके सपा जिले में पार्टी की ओवरहॉलिंग करना चाहती है ताकि निष्क्रिय पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सके और गुटबाजी को कम किया जा सके।
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जिस पर निष्क्रियता का आरोप, उन्हें ही छोड़ा...
बदायूं। बदायूं में पार्टी के जिलाध्यक्ष का ताज आशीष यादव के सिर पर है, लेकिन उनको बहाल रखा गया है, जबकि पार्टी के पदाधिकारी उन पर सबसे ज्यादा निष्क्रिय होने का आरोप लगाते रहे हैं। पार्टी के तमाम लोगों का कहना है कि जिलाध्यक्ष किसी भी गतिविधि में न तो हिस्सा लेते हैं और न ही विपक्ष की तरह जनहित में आवाज उठाते हैं। ऐसे में केवल उन्हें ही बहाल रखना पदाधिकारियों की समझ से भी परे है। जमीनी स्तर पर देखें तो पदाधिकारियों की बातों में दम भी नजर आता है, क्योंकि जिलाध्यक्ष को पार्टी के एक गुट के तौर पर भी देखा जाता है।
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अब जानिये क्षेत्रवार पार्टी की स्थिति
बदायूं और शेखूपुर-
बदायूं। बदायूं सदर सीट पर फिलहाल भाजपा के महेश गुप्ता काबिज हैं लेकिन शेखूपुर सीट सपा के कब्जे में है। यहां से जिलाध्यक्ष आशीष यादव के बेटे हिमांशु यादव विधायक हैं। साल 2027 में आने वाले विधानसभा चुनाव की बात करें तो पूर्व विधायक आबिद रजा खुद को बदायूं और शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र से भावी प्रत्याशी के तौर पर जनता के सामने पेश कर रहे हैं। उनका प्रयास किसी एक सीट से चुनाव लड़ना है। माना जा रहा है कि वह इसमें से एक सीट पर टिकट पाने में कामयाब भी होंगे। पर, पार्टी के अंदरखाने के सूत्रों की मानें तो आबिद रजा का विरोधी गुट उनका टिकट कटवाने के लिए उनके सामने दूसरे दावेदार तैयार कर रहा है। इनमें दातागंज के एक प्रमुख कारोबारी के बेटे व एक पूर्व मंत्री के बेटे को भी बतौर दावेदार तैयार किया जा रहा है। इसमें एक संभावित दावेदार सवर्ण तथा दूसरा कुर्मी विरादरी से आता है। इससे पहले भी आबिद का विरोधी गुट निकाय चुनाव में उनके खिलाफ दूसरा प्रत्याशी उतारकर विरोध कर चुका है। हालांकि इस चुनाव में सपा ने अपना सिंबल किसी को नहीं दिया था।
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बिसौली-
बदायूं। बिसौली विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक आशुतोष मौर्य भले ही अभी भी सपा के ही माने जाते हैं लेकिन मन से वह भाजपाई हो चुके हैं। उनके द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग में भी यह बात जगजाहिर हो चुकी है। यह स्थिति तब है कि जब जिलाध्यक्ष का पैतृक गांव मानपुर इसी तहसील में आता है। जिलाध्यक्ष अपने पैतृक क्षेत्र में ही विधायक को बचाकर नहीं रख पाए।
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सहसवान-
बदायूं। सहसवान से कई बार विधायक रहे चुके ओमकार सिंह के बेटे ब्रजेश यादव मौजूदा विधायक हैं। सभी जानते हैं कि ये वही क्षेत्र है जहां से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का टिकट कटवाने की कवायद शुरू की गई थी। कुछ विधायकों समेत कई पदाधिकारियों ने उस समय धर्मेंद्र यादव की मुखालफत करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को पत्र भेजकर उन्हें बदायूं से टिकट न देने की मांग की थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में अपना वर्चस्व रखने की खातिर पार्टी के ये लोग धर्मेंद्र यादव को किनारे कर एक व्यक्ति विशेष को सांसद बनाने की ख्वाहिश रखते थे। हालांकि पार्टी हाईकमान ने उनकी मंशा पर पानी तब फेर दिया जब शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव को टिकट दे दिया।
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बिल्सी, दातागंज-
बदायूं। बिल्सी की बात करें तो यहां से भी पार्टी के इन विरोधी गुट का प्रयास यह रहा कि प्रदेश में सपा की सरकार तो बन जाए, लेकिन बिल्सी से सपा का प्रत्याशी न जीत पाए। यही वजह रही कि दो दशकों से भी ज्यादा समय से यहां सपा का कोई प्रत्याशी नहीं जीत सका। दातागंज सीट की बात करें तो यहां एक पूर्व विधायक समेत एक पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के बेटे के बीच गुटबाजी चरम पर है। दोनों ही लोग 2027 में टिकट पाना चाहते हैं चाहें इसके लिए कुछ भी करना पड़े।
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...कितनी खत्म हो पाएगी गुटबाजी, क्या होगा असर
बदायूं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जिला कमेटी समेत सभी संगठनों को भंग करके नई कार्यकारिणी का गठन करने का फायदा तभी है जब जिले में पार्टी का नेतृत्व करने वाला सक्रिय रहे, लेकिन ऐसा तभी हो पाएगा जब हाईकमान सभी को एक ही नजर से आंके। फिलहाल जिलाध्यक्ष को छोड़कर सभी कमेटियों को भंग करने की बात पार्टी के तमाम पदाधिकारी पचा नहीं पा रहे हैं।
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