बदायूं। जयपुर से आए शायर शाकिर रज़ा बदायूंनी के सम्मान में ककराला में शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। शायरों ने बेहतरीन कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
बज्मे नूरुल अदब के कार्यालय पर नशिस्त में मेहमान शायरों का स्वागत किया गया। शाकिर रज़ा बदायूंनी ने नात पढ़ी-
नबी के नाम की तख्ती लगी है,
इसी बाइस तो घर में रोशनी है।
अरशद रसूल ने सुनाया-
अगर हिंदू मुसलमां का यहां झगड़ा नहीं होता,
हमारे मुल्क का नक्शा कभी ऐसा नहीं होता।
अध्यक्षता करते हुए डॉ. सोहराब ककरालवी ने गजल सुनाई-
चांद को न छू पाए उम्र भर वही बौने,
चांदनी के दामन पर तोहमतें लगाते हैं।
चांद ककरालवी ने कुछ यूं सुनाया-
शिद्दत बला की होती है जिस वक्त प्यास में,
दरिया दिखाई देता है खाली गिलास में।
आबशार आदम ने पढ़ा-
ठोकरें खा के आप गिर जाएं,
इतनी रफ़्तार भी नहीं अच्छी।
अजमत जीलानी ने भावनाओं को यूं व्यक्त किया-
तैर तो लेता हूं मुहब्बत में,
कोई सिखला दे डूबना मुझको।
संचालन कर रहे जाकिर अली खां ने कहा-
इतनी शिद्दत से किया है हमने तेरा इंतजार,
शाम तक हो जाएंगे पत्थर अगर बैठे रहे।
आगाज साकी ने पढ़ा-
वो शख्स था ही नहीं एतबार के लायक,
कही थी पहले भी यह बात आपसे मैंने।
आखिर में अजमत जीलानी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
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by Anonymous
ये अनमोल डॉक्टर डोनेशन वाला है। ये और इसका बाप दोनों haraami है
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by SAB KI BAAT
Good
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by Anonymous
भाजपा जनता को पागल समझ रही है। अगले चुनाव में मिलेगा इसका खामियाजा