बदायूं। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के विरुद्ध लगातार हो रहे हमले, मंदिरों को निशाना बनाए जाने, महिलाओं और बच्चों के साथ की जा रही बर्बरता के विरोध एवं इस पर भारत सरकार की चुप्पी के खिलाफ आम आदमी पाटी के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष भूदेव सिंह राठौर के नेतृत्व में प्रदर्शन कर विरोध जताया गया। इसके बाद राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा गया।
कार्यकर्ताओं ने आंबेडकर पार्क के पास बांग्लादेश का पुतला फूंका। इसके बाद दिए ज्ञापन में कहा गया है कि आम आदमी पार्टी का स्पष्ट मत है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और नैतिक नेतृत्व वाले राष्ट्र से यह अपेक्षा की जाती है कि वह पड़ोसी देश में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे संगठित अत्याचारों पर केवल मौन न साधे, बल्कि अपनी कूटनीतिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय शक्ति का प्रयोग कर पीड़ितों की

सुरक्षा सुनिश्चित कराए। मौजूदा परिस्थितियों में भारत सरकार की चुप्पी न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि इससे अत्याचारियों का मनोबल भी बढ़ रहा है।
कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति से संविधान के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार को तत्काल और कठोर निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग भी की है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष भूदेव सिंह राठौर, दिनेश सिंह राठौड़, राकेश सोलंकी, आदित्य गुप्ता, सत्येंद्र यादव, गौरव, मनोज सिकरवार, रूपेंद्र कुमार आदि लोग उपस्थित थे।
------
ये हैं ज्ञापन में की गई मांगे
- भारत व बांग्लादेश के सभी व्यापारिक एवं कूटनीतिक संबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएं, जब तक बांग्लादेश सरकार हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं देती।
- केंद्र सरकार द्वारा बांग्लादेश को दी जा रही बिजली की आपूर्ति पर तुरंत रोक लगाई जाए, क्योंकि भारत के संसाधनों का उपयोग ऐसे देश के लिए नहीं हो सकता जहां हिन्दू अल्पसंख्यकों का खुलेआम उत्पीड़न हो रहा हो।
- अडानी समूह द्वारा बांग्लादेश को दी जा रही बिजली की आपूर्ति पर भी तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि किसी भी निजी या कॉर्पाेरेट लाभ के लिए भारत की नैतिक जिम्मेदारियों से समझौता न हो।
- बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में जिस प्रकार विशेष अतिथि की तरह संरक्षण दिया जा रहा है, उसके चलते बांग्लादेश में भारतीयों और विशेषकर हिंदुओं के विरुद्ध नफरत और हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है। इस विषय पर प्रधानमंत्री को तत्काल कड़ा और स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, जिससे यह संदेश जाए कि भारत किसी भी रूप में हिंदू विरोधी हिंसा का समर्थन या संरक्षण नहीं करता।
SAB KI BAAT
