पीड़ितों को त्वरित राहत देने की दिशा में केंद्र सरकार ने उठाया कदम
सबकी बात न्यूज। साइबर ठगी के रोजाना बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने पीड़ितों को तत्काल राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के तहत साइबर फाइनेंशियल क्राइम रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के लिए नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को मंजूरी दे दी है। इस SOP के तहत 50 हजार से कम की साइबर ठगी की राशि को कोर्ट आदेश के बिना सीधे पीड़ित को लौटाने का प्रावधान किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी मामले में अदालत या धन बहाली से जुड़ा कोई आदेश मौजूद नहीं है, तो बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों को 90 दिनों के भीतर उस राशि पर लगाया गया होल्ड हटाना अनिवार्य होगा।
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छह वर्षों में करीब 53 हजार करोड़ का नुकसान
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आंकड़ों की मानें तो बीते छह वर्षों में भारतीय लोगों को साइबर ठगी के विभिन्न मामलों में करीब 53 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। डिजिटल लेनदेन में तेज़ी बढ़ने के साथ-साथ इसमें और बढ़ोतरी हुई है।
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खातों को फ्रीज करने से निर्दोष भी होते हैं परेशान
- अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मौजूदा सिस्टम में अक्सर संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिलने पर खातों को फ्रीज़ कर दिया जाता था, जिससे कई मामलों में निर्दाेष खाताधारकों को भी महीनों तक परेशानी झेलनी पड़ती थी। अब नई एसओपी (SOP) का उद्देश्य इसी समस्या का समाधान करना है ताकि जिन लोगों को साइबर ठगों द्वारा मोहरा बनाया जाता है, उन्हें परेशानी न हो। दरअसल, साइबर ठग कई मामलों में ऐसे लोगों के खातों का प्रयोग भी कर लेते हैं, जिनकी जानकारी खाताधारकों को भी नहीं होती।
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निर्धारित समय सीमा में करनी होगी कार्रवाई
- नई व्यवस्था के तहत बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC), ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, स्टॉक ट्रेडिंग ऐप्स, म्यूचुअल फंड हाउस और अन्य वित्तीय मध्यस्थों के लिए एक समान प्रक्रिया तय की गई है। जैसे ही किसी संदिग्ध साइबर लेनदेन की शिकायत दर्ज होती है, सभी संबंधित संस्थानों को निर्धारित समय-सीमा और दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। नई व्यवस्था में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किस परिस्थिति में खाता फ्रीज़ किया जाएगा, कब आंशिक रोक लगाई जाएगी और किन मामलों में तुरंत धन बहाली की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इसका उद्देश्य अनावश्यक फ्रीज़िंग को रोकना और वास्तविक पीड़ितों को समय पर राहत देना है।
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त्रिस्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था
- नई एसओपी (SOP) में त्रिस्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत, यदि किसी व्यक्ति का खाता या राशि बिना ठोस आधार के रोकी जाती है, तो वह निर्धारित डिजिटल चैनल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेगा। इसके तहत पहले स्तर पर संबंधित वित्तीय संस्था मामले की समीक्षा करेगी। दूसरे स्तर पर शिकायत को उच्च प्राधिकरण के समक्ष भेजा जाएगा। तीसरे और अंतिम स्तर पर, समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय समन्वय प्रणाली हस्तक्षेप करेगी।
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ऐसे समझिये हर साल बढ़ रहे मामलों को
- एनसीआरपी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 21.77 लाख से अधिक ठगी से जुड़े मामलों में 19,812.96 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया। 2024 में यह आंकड़ा 22,849.49 करोड़ रहा, जबकि 2023 में 7,463.2 करोड़ की ठगी हुई। 2022 में नुकसान 2,290.23 करोड़, 2021 में 551.65 करोड़, और 2020 में 8.56 करोड़ दर्ज किया गया।
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ठगी हो तो सबसे पहले 1930 पर कॉल
- साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति से किसी भी तरह साइबर ठगी हो जाती है तो उसे सबसे पहले 1930 पर फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। तुरंत एक्शन लेने पर ठगी की राशि को होल्ड किया जा सकता है और वह ठग के पास जाने से रुक सकती है। ऐसे में ठगी होने पर तत्काल ही 1930 पर कॉल करने की सलाह दी जाती है।




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