एक भाग शत्रु संपत्ति के रूप में हो चुका है दर्ज, उझानी के बताए जा रहे खरीदार,
साल 2020-21 में काफी चर्चित रह चुका है शत्रु संपत्ति और इससे जुड़ी विवादित जमीन का मामला
रिटायर्ड कानूनगो की भूमिका आ रही सामने, 20 साल सहसवान में रह चुकी है तैनाती
बदायूं। सहसवान में शत्रु संपत्ति से सटी जमीन एक बार फिर चर्चा में आ गई है। भूमाफिया ने इसे बेचा तो अब इसे लेने वाले लोगों ने इस पर बाउंड्री करा दी है और प्लाटिंग कराकर इसे बेचने की तैयारी में लग गए हैं। इसकी शिकायत एक बार फिर जिले के आला अधिकारियों से की गई है।
सहसवान में शहवाजपुर और जाहिदपुर मालपुर की जमीनों में फर्जीवाड़ा करके बेचने का मामला भले ही कुछ साल पुराना हो गया हो लेकिन अब उससे सटी जमीन एक बार फिर बेचे जाने के कारण चर्चा में है। बताया जाता है कि भूमाफिया ने इसे कुछ लोगों को बेच दिया जो अब वहां प्लाटिंग कराने के चक्कर में लगे हैं। इसके लिए वहां बाउंड्री करा दी गई है।
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ये है पुराना मामला
बदायूं। सहसवान की शहवाजपुर स्थित विवादित जमीन की मालकिन शमसुल निशा के पति का नाम अली अहमद था। उनके दो बेटे अयूब अहमद व अमीर अहमद तथा तीन बेटियां खुदैजा बेगम, जकिया बेगम व रजिया बेगम थीं। इनमें रजिया को छोड़कर सभी लोग 1953 54 में पाकिस्तान चले गए थे जिसके बाद गाटा संख्या 78, 86/1 व 86/2 शत्रु संपत्ति के रूप में चढ़ गए जबकि अन्य निष्क्रांत संपत्ति में दर्ज हो गई। फर्जीवाड़े की शुरुआत इसके बाद से ही हुई।
उन दिनों इसकी शिकायत सहसवान निवासी जमशेद उर्फ गुड्डू ने की थी। उनके अनुसार, तत्कालीन चेयरमैन हबीबुर्ररहमान ने यह संपत्ति अपनी खाला मौसी हबीबबानो के नाम से चढ़वा दी। हबीबबानो के पति का नाम अहमद अली था जो शमसुल निशा के पति अली अहमद जैसा लगता था। इसका फायदा उठाते हुए कागजों में हेरफेर कर ली गई। जमीन का कुछ हिस्सा अयूब खां ने हबीबबानो को बेच भी दिया था। इसके बाद हबीब बानो का इंतकाल ईरान में हो गया। उनका बेटा नवेद कनाडा में और बेटी ईरम दिल्ली में रहती है।
साल 2019 में भूमाफिया की नजर इस जमीन पर पड़ी तो उन्होंने नवेद से संपर्क साधकर इसकी वरासत चढ़वा दी। इसके बाद नवेद से पॉवर ऑफ एटार्नी उसकी बहन ईरम के नाम करा ली गई और इरम से यह जमीन भूमाफिया ने अपने नाम करा ली। इसके बाद यहां प्लॉटिंग शुरू कर दी गई। इसी मामले की शिकायत जमशेद गुड्डू ने प्रशासन और शासन से की थी जिसके बाद इसकी जांच शुरू हो गई। शिकायत में यह भी कहा गया था कि फर्जीवाड़ा करते हुए शमसुल निशा को बैनामा कराने अमरोहा ले जाया गया जबकि वहां उस समय सब रजिस्ट्रार बैठता था। बदायूं में रजिस्ट्रार होते हुए भी बैनामा यहां नहीं कराया गया।
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जमीन खरीदकर एग्रीमेंट कर दिया अन्य प्रॉपर्टी डीलरों के नाम
बदायूं। इरम से जमीन अपने नाम कराकर भूमाफिया ने पहले तो यहां खुद प्लॉटिंग शुरू कराई थी, लेकिन पिछली बार तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत के संज्ञान में मामला आने पर जांच शुरू हो गई। डीएम ने कई कार्रवाई भी कीं जिसके बाद इस जमीन का एग्रीमेंट बिल्सी के कुछ प्रॉपर्टी डीलरों से कर दिया गया था।
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अब इससे सटी जमीन का बताया जा रहा मामला
बदायूं। अब जो ताजा मामला है वह इससे सटी 12 बीघा जमीन का ही बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि इससे सटी 12 बीघा जमीन और भी है, जिसे भूमाफिया ने कुछ लोगों को बेच दिया है। ये लोग सहसवान और उझानी के बताए जा रहे हैं और इस जमीन पर प्लॉटिंग करा रहे हैं। यहां कुछ निर्माण कर भी शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इसमें एक कानूनगो की भूमिका है जो अब सेवानिवृत्त हो चुका है। यह कानूनगो शत्रु संपत्ति तथा इससे संबंधित विवादित भूमि के मामले में भी चर्चित रह चुका है। बताते हैं कि यह कानूनगो करीब 20 साल सहसवान में ही तैनात रहा और एक बार उस पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। इसकी शिकायत जिले के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर की गई है।
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