प्रभातफेरी पर खाकी का 'कोप'...धक्कामुक्की से शुरू हुआ हंगामा, फिर जमकर हुआ बवाल
पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप, कहा- महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा
रुट बदलने को लेकर शुरू हुआ विवाद, ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ किया प्रदर्शन
बदायूं। माघ माह में प्रभातफेरी निकालने को लेकर इस्लामनगर के गांव ब्योर कासिमाबाद में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। पहले पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई इसके बाद धक्कामुक्की शुरू हो गई। आरोप है कि पुलिस ने ग्रामीणों पर लाठियां बरसाईं और महिलाओं तथा बच्चों को भी नहीं बख्शा। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने थाने पर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया।

गांव के लोगों के अनुसार, माघ माह में पिछले करीब 50 सालों से प्रभात फेरी निकलती आ रही है, लेकिन शुक्रवार को पुलिस ने इसे रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस का कहना था कि जिस रास्ते से प्रभातफेरी निकाली जा रही है, वह विवादित है। पुलिस के इस कथन पर ग्रामीण नाराज हो गए और उनकी पुलिस कर्मियों से
कहासुनी हो गई। आरोप है कि पुलिस वालों ने ग्रामीणों से धक्कामुक्की कर दी। ग्रामीणों में आक्रोश फैला तो पुलिस ने उन पर लाठियां बरसा दीं, जिसमें कई महिलाएं और बच्चे भी घायल हो गए। आरोप है कि पुलिस ने लोगों को गिराकर उनके पैरों में लाठियां मारीं। हंगामे के बाद एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया और बिसौली एसडीएम राशिकृष्णा मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर प्रभातफेरी निकलवाई।
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ऐसे हुई बवाल की शुरुआत
बदायूं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव ब्योर कासिमाबाद में करीब 50 साल से अपने तय रूट से प्रभातफेरी निकलती आ रही है। बताते हैं कि इस बार दूसरे समुदाय के लोगों की इसे लेकर आपत्ति जताई, जिस पर पुलिस ने रूट को विवादित बताते हुए प्रभातफेरी को रोक दिया। इस पर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और उनकी पुलिस से झड़प हो गई। जब हालात बेकाबू हो गए तो बिल्सी और उघैती पुलिस के साथ पीएसी भी बुला ली गई। दोपहर तक थाने पर हंगामा होता रहा। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेपर पर ग्रामीण शांत हुए।
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''ग्रामीणों ने गैर परंपरागत मार्ग से प्रभातफेरी निकालने का प्रयास किया था, जिस पर लोगों से धक्कामुक्की हो गई। ग्रामीणों ने मार्ग निर्धारण के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। मामले की जांच एसपी सिटी को दी गई है। जो भी दोषी पाया गया, उस पर कार्रवाई की जाएगी। ''
डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, एसएसपी


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