फर्जी शपथपत्र लगाकर हथिया ली दुकान, विरोध करने पर पीटा...अब कोर्ट ने किया तलब

फर्जी शपथपत्र लगाकर हथिया ली दुकान, विरोध करने पर पीटा...अब कोर्ट ने किया तलब

बदायूं। भाई-बहनों के फर्जी शपथपत्र लगाकर नगर पालिका की दुकान को एक भाई द्वारा अपने नाम करा लिया गया। दूसरे भाई-बहनों ने जब विरोध किया तो दुकान पर कब्जा करने वाले भाई, उसकी पत्नी तथा बेटे ने एक बहन को लात घूसों से जमकर पीटा तथा जान से मारने की धमकी दी। नगर पालिका द्वारा भी अनसुनी करने पर पीड़िता ने कोर्ट की शरण ली, जिसके बाद सीजेएम ने भाई, उसकी पत्नी व बेटे को कोर्ट में तलब होने के निर्देश दिए हैं। 

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ये है पूरा मामला

बदायूं। शहर के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी राकेश साहू चार भाई व तीन बहने हैं। उनके पिता दुर्गाप्रसाद साहू के नाम से मोहल्ला कारमेकलगंज में नगर पालिका की दुकान है। दुर्गाप्रसाद की 23 साल पहले मौत चुकी है। इसके बाद सभी भाई दुकान में मिलकर व्यापार कर रहे थे। राकेश के अनुसार, वह साल 2010 में काम के सिलसिले में पुणे चले गए थे। वहां से लौटने पर उन्हें पता चला कि उनके भाई नरेश साहू ने पालिका के कर्मचारियों से साठगांठ करके दुकान अपने नाम करा ली है। 

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खुद अपना फर्जी शपथपत्र देखकर चौंक गए राकेश

बदायूं। राकेश के अनुसार, जब वह इसकी जानकारी लेने पालिका कार्यालय पहुंचे तो भाई नरेश के पक्ष में उनके सभी भाई बहनो के शपथ पत्र लगे थे। खुद उनका भी शपथपत्र लगा था जबकि उन्होंने कोई शपथपत्र नहीं दिया था। उनके भाई बहनों ने भी कोई शपथपत्र नहीं दिए थे। उन्होंने भाई द्वारा की गई इस जालसाजी की शिकायत पालिका में की लेकिन पालिका ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। 

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पूरी तरह फर्जीवाड़ा करके दुकान करा ली नाम

बदायूं। राकेश की बहन शीला साहू का कहना है कि उनके भाई ने फर्जीवाड़ा तथा पालिका कर्मियों से साठगांठ करके धोखाधड़ी की है। जो शपथपत्र लगाए गए हैं उनमें नाम किसी का और फोटो किसी और की लगी है। उन्होंने जब अपने भाई नरेश साहू से विरोध जताया तो उन्होंने दुकान में हिस्सा देने से साफ इंकार कर दिया। शीला का कहना है कि विगत पांच अगस्त की शाम छह बजे वह मंदिर गई थी। वहां उन्हें भाई नरेश समेत उनकी पत्नी मुन्नीदेवी तथा बेटा चेतन साहू मिले। जब उन्होंने धोखाधड़ी का कारण जानना चाहा तो तीनों ने उन्हें गालियां देते हुए पीटना शुरू कर दिया। इससे उसकी उंगली में फ्रेक्चर भी हो गया। राहगीरों ने उन्हें जैसे तैसे बचाया। 

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पुलिस ने भी नहीं सुनी तो ली कोर्ट की शरण

बदायूं। शीला देवी के अनुसार, उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस को दी लेकिन पुलिस ने भी उनकी नहीं सुनी। इस पर उन्होंने कोर्ट की शरण ली और आरोपितों के खिलाफ परिवाद दायर कराया। इस पर सीजेएम मोहम्मद तौसीफ रजा ने विगत बुधवार को तीनों आरोपितों को एक नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। 


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  • user by संजीव

    इसे भी ईंट से खींचकर मारो जान से

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  • user by Mala

    Good reporting

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  • user by सुधाकर सिंह नोएडा

    रिपोर्टिंग ये होती है। जिन पर रिपोर्ट लिखी उनके नाम तक नहीं दिए। जरूरी नहीं कि महिला ही पीड़ित हो। कभी कभी लड़का पक्ष भी सही होता है। इसका ध्यान रखना बहुत अच्छी बात है। आखिर लड़के पक्ष की भी इज्जत होती है। शाबाश सबकी बात न्यूज

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