कुल के मौके पर अकीदतमंदों ने चादरपोशी व गुलपोशी कर मांगी दुआएं
वतन व कौम की सलामती व खुशहाली के लिए की गई दुआएं
बदायूं। दरगाह कुत्बे औलिया हजरत मजाक मियां साहब रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर 135 वें तीन रोजा सालाना उर्स के आखिरी दिन पूरी रात तक चले कव्वाली के दौर के बाद सुबह दूसरे कुल शरीफ की महफिल की रस्स अदायगी की गई। इसके बाद कव्वाली के साथ महफिले रंग की महफिल हुई जिसमें हाजिर अकीदतमंद कव्वाली सुनकर झूम उठे।

शनिवार पूरी रात कव्वाली का दौर चला जिसमें बरेली के कव्वाल जीशान फैजान मजाकी, सिरौली के बिट्टू शेरी, आरिफ नियाजी बरेली, मासूम कव्वाल शाहजहांपुर, सलमान शाहजहांपुर, माजिद नियाजी रामपुर, तनबीर बरेली ने अपनी टोलियों के साथ पाकीजा व रुहानी कलामों की बौछार कर महफिल में हाजिर लोगो का दिल जीत लिया। लोगों ने खुश होकर कव्वालों के ऊपर रुपयों की जमकर बारिश की। इस बीच बहुत से अकीदतमंदों व जायरीनों ने हजरत मजाक मियां साहब के मजारे मुबारक पर चादरपोशी व गुलपोशी के साथ दुआएं व मन्नतें मांगी।
दोपहर में एक बजे तीसरे कुल शरीफ की रस्म अदायगी कर वतन व कौम के अमनो आमान, खुशहाली व सलामती के लियें दुआएं खैर की गई। उर्स में बडे ही अदबोअहतराम के साथ महफिलों का आयोजन किया गया।
दरगाह के सज्जादानशीन हजरत ख्वाजा सैयद मोहम्मद इख्तियार अली शाह अल मजाकी, हजरत ख्वाजा सैयद आसार अली शाह अल मजाकी, हजरत ख्वाजा सैयद इजहार अली शाह अल मजाकी, हजरत ख्वाजा सैयद फ़जल अली शाह अल मजाकी ने चादरपोशी व गुलपोशी करने में लोगो की मदद कर दुआओं से नवाजा।
इस मौके पर आवामी अकीदतमंदों के अलावा एमपी, रतलाम, जोयरा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली आदि बहुत सी जगहों के लोग मौजूद रहे।
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समाजवादी महिला सभा ने भी की चादरपोशी
बदायूं। समाजवादी महिला सभा की जिलाध्यक्ष संतोष कश्यप ने अपनी महिला सभा टीम के साथ दरगाह की हाजिरी लगाकर हजरत मजाक मिया साहब के मजारे मुबारक पर चादरपोशी व गुलपोशी कर अपने मुफाद की दुआएं मांगी। दरगाह के सज्जादानशीन हजरत सैय्यद इख्तियार अली शाह अल मजाकी, हजरत सैय्यद आसार अली शाह अल मजाकी, हजरत सैय्यद इजहार अली शाह अल मजाकी ने
उनकी चादरपोशी करने में मदद की और उन्हें दुआओं से नवाजा। इसके साथ ही दरगाह की चादर पहनाकर उनको सम्मानित भी किया। युवा नेता अमन मयंक शर्मा ने भी उर्स में हाजिरी कर मजारे मुबारक पर गुल पेश किये। सज्जादानशीनो ने उनके सिर पर आस्ताने की चादर की पगडी बांधकर उन्हें सम्मानित किया।
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