मुहब्बत में सुनते हैं मिलावट बहुत है...

मुहब्बत में सुनते हैं मिलावट बहुत है...

बरेली। कवि गोष्ठी आयोजन समिति के तत्वावधान में शास्त्री नगर में नीतीश कपूर के संयोजन में सरस काव्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता रणधीर प्रसाद गौड़ धीर ने की। मुख्य अतिथि विनय सागर रहे। 

कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण से किया गया। संस्था के सचिव गीतकार उपमेंद्र सक्सेना ने अपनी रचना इस प्रकार प्रस्तुत की -

बेबसी में आदमी के इस तरह आंसू बहे

एक दिन तेजाब का बादल अचानक फट गया।

अमित मनोज ने सुनाया-

कि जिनको कभी न जमीं दीखती थी

सुना भाव में अब गिरावट बहुत है

असर ही नहीं कुछ तिरे इश्क़ का अब

मुहब्बत में सुनते हैं मिलावट बहुत है।

कवि हरिकांत मिश्र चातक ने अपनी रचना इस प्रकार प्रस्तुत की

निकले तन से प्राण जब,सब सम्बन्धी तब रोय।

पत्नि- पुत्री रो कर कहे, अब मेरा क्या होय।।

सरस काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं के माध्यम से देर शाम तक समां बाँधे रखा। इस अवसर पर संस्था के सचिव उपमेंद्र सक्सेना, दीपक मुखर्जी, राम कुमार कोली, बृजेंद्र तिवारी अकिंचन, रामधनी निर्मल, डीपी शर्मा निराला, रामकुमार भारद्वाज, अफरोज, अमित मनोज, रामप्रकाश सिंह ओज, पीयूष गोयल बेदिल, मनोज सक्सेना, मनोज दीक्षित टिंकू, उमेश अद्भुत, हरिकांत मिश्र चातक, रीतेश साहनी, सत्यवती सिंह, राजकुमार अग्रवाल आदि उपस्थित रहे। संचालन राजशुक्ल गजलराज ने किया।

Leave a Reply

Cancel Reply

Your email address will not be published.

Follow US

VOTE FOR CHAMPION

Top Categories

Recent Comment

  • user by Anonymous

    जनप्रतिनिधि महेश गुप्ता ही होगा। वो ही बपौती समझता है। बेटे को विधायक बनाने की जोगाड़ में है। पर बना नहीं पाएगा। बाप कहता है हरी बोल बेटा कहता है जेब खोल

    quoto
  • user by Anonymous

    कुशाग्र ko ही मिलेगा टिकट

    quoto
  • user by Anonymous

    कुत्ता साला

    quoto