सहसवान में शत्रु संपत्ति समेत अन्य विवादित जमीनों पर किए जा रहे कब्जे, कई सरकारी कर्मचारियों की मिली भगत
बदायूं। सहसवान स्थित एक जमीन को कब्रिस्तान के रूप में फर्जी तरीके से दर्ज कराने का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने इसे कब्रिस्तान दर्ज कराकर खुर्द बुर्द करने की कोशिश की लेकिन जब आरटीआई डाली गई तो मामला कुछ और ही निकला। आरटीआई में पता चला कि जमीन को कब्रिस्तान दर्ज करने का कोई सरकारी आदेश नहीं था।
सहसवान के शहबाजपुर नगर से सटा हुआ गाटा संख्या 107 व 108 बदायूं-मेरठ राजमार्ग पर स्थित है। बताया जाता है कि इस जमीन के मालिक रजब अली शाह पुत्र निजाम अली, बाबू शाह पुत्र रजब अली, मुन्ने शाह पुत्र रजब अली, महबूब शाह आदि थे। इन लोगों से कुछ लोगों ने यह जमीन खरीदने की कोशिश की और जब जमीन की खसरा खतौनी की नकल ली गई तो गाटा संख्या 107 व 108 में से गाटा संख्या 107 के आगे खसरे में कब्रिस्तान चढ़ा हुआ था जबकि 108 गाटा संख्या का स्थान खाली था।
इसके बाद नगर निवासी सुरजीत कौशिक ने इस मामले में आरटीआई डाली तो पता चला कि फसली वर्ष 1419 गाटा संख्या 107 व 108 क्षेत्रफल 0.291 में कब्रिस्तान बाग दर्ज दिखाया गया जबकि खसरे में गाटा संख्या 107 में कब्रिस्तान दर्ज है। इसी सूचना के जवाब में बताया गया कि सक्षम अधिकारी द्वारा ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है। उन्होंने पता किया तो ज्ञात हुआ कि इसमें एक सेवानिवृत्त लेखपाल और कानूनगो की भूमिका है। इन लोगों द्वारा अधिकारियों के बिना संज्ञान में लाये गाटा संख्या 107 में कब्रिस्तान दर्ज कर दिया गया जब खसरे की नकल फसली वर्ष 1997 1402 में कोई भी कब्रिस्तान किसी भी गाटा संख्या में दर्ज नहीं है। यह कानूनगो भी अब सेवानिवृत्त हो चुका है। इसके अलावा सन 2012 से पूर्व जितने भी खसरा खतौनी की नकल प्राप्त की गई उसमें कहीं भी कब्रिस्तान दर्ज नहीं था। अब सुरजीत कौशिक ने इस मामले से अधिकारियों को अवगत कराते हुए जांच की मांग की है।
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