घर में थी बहन की शादी...एक दिन पहले कुछ ऐसा हुआ कि छा गया मातम

घर में थी बहन की शादी...एक दिन पहले कुछ ऐसा हुआ कि छा गया मातम

बदायूं। शौच को जा रही एक महिला की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो गई। महिला अपनी बहन की शादी में शामिल होने अपने मायके आई थी। बुधवार को उसकी बहन की शादी थी। महिला की मौत के बाद घर में मातम छा गया है। (नीचे और पढें) -


मुजरिया क्षेत्र के गांव सिरकी खेड़ा निवासी प्रीति का मायका रफीनगर गांव में है। प्रीति की बहन की बुधवार को शादी थी, जिसमें शामिल होने प्रीति रफीनगर आई हुई थी। बताते हैं कि मंगलवार सुबह प्रीति शौच जाने के लिए मुजरिया बिल्सी रोड पार कर रही थी कि तभी किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में प्रीति की मौत हो गई। जब इसकी जानकारी ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने वहां जाम लगा दिया। करीब दो घंटे लगे जाम के कारण दोनों ओर वाहन एकत्र हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। ग्रामीणों का कहना था कि रोड पर पुलिस ने कैमरे तो लगवाए हैं लेकिन वह बंद रहते हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश दिखाई दिया। (नीचे और पढें) -

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पिछले महीने एक ग्रामीण ने गवांई थी जान, तब पुलिस ने दिया था आश्वासन

बदायूं। कुछ समय पहले गांव रफीनगर के किशनवीर का भी इसी रोड पर एक्सीडेंट हो गया था, जिसकी मौत आठ माार्च को हो गई थी। तब भी ग्रामीणों ने पुलिस से रोड के कैमरे ठीक करवाने को कहा था ताकि टक्कर मारने वाले वाहनों का पता चल सके, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इससे मंगलवार को ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने जाम लगा दिया। (नीचे और पढें) -

खनन के चक्कर में ठीक नहीं कराए जाते कैमरे

बदायूं। ग्रामीणों का कहना है कि इस रोड से खनन करने वालों के ट्रैक्टर ट्राली गुजरते हैं, जिनसे पुलिस वसूली करती है। इसी चक्कर में कैमरे ठीक नहीं कराए जाते ताकि पुलिस की करतूत सामने न आ सके। (नीचे और पढें) -


बिन मां के रह गए तीन मासूम

बदायूं। प्रीति और उसके पति बागीश के तीन बच्चे हैं। इनमें सबसे बड़ी बेटी उमंग केवल सात साल की है। जबकि उससे छोटा बेटा गोविंद छह और केशव केवल चार साल का है। प्रीति की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है।


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  • user by संजीव

    इसे भी ईंट से खींचकर मारो जान से

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  • user by Mala

    Good reporting

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  • user by सुधाकर सिंह नोएडा

    रिपोर्टिंग ये होती है। जिन पर रिपोर्ट लिखी उनके नाम तक नहीं दिए। जरूरी नहीं कि महिला ही पीड़ित हो। कभी कभी लड़का पक्ष भी सही होता है। इसका ध्यान रखना बहुत अच्छी बात है। आखिर लड़के पक्ष की भी इज्जत होती है। शाबाश सबकी बात न्यूज

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