चप्पलें तो कपड़े की बता दीं, पर स्पोर्ट्स शू किस 'कपड़े' के बने थे जनाब....इसका क्या देंगे जवाब ?

चप्पलें तो कपड़े की बता दीं, पर स्पोर्ट्स शू किस 'कपड़े' के बने थे जनाब....इसका क्या देंगे जवाब ?

पुलिस ने पालिकाध्यक्ष को नोटिस भेजकर मांगा जवाब

बदायूं। पिछले दिनों नगर पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा का भंडारे में चप्पलें पहनकर प्रसाद बांटने का मुद्दा उछला तो कई दिनों तक चर्चा में रहा। चर्चा इतनी हुई कि पालिकाध्यक्ष की सफाई में उनके पति और पूर्व मंत्री आबिद रजा तक को प्रेस कान्फ्रेंस बुलाकर सफाई देनी पड़ी। अब पुलिस ने इस मामले की तहरीर पर पालिकाध्यक्ष को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। 

पालिकाध्यक्ष की चप्पलें पिछले दिनों खासी चर्चा में तब आ गईं जब उन्होंने इन्हें पहनकर ओवरब्रिज के नीचे स्थित आदि शक्ति दुर्गा माता मंदिर में आयोजित भंडारे में प्रसाद बांट दिया। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी थे जो  स्पोर्ट्स शूज पहने थे और उनके साथ-साथ चल रहे थे। जब ये वीडियो सामने आई तो हिंदू संगठनों में उबाल आ गया। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद (ब्रज प्रांत) के प्रांत युवा गोरक्षा प्रमुख संजीव कुमार प्रजापति ने इस पर आपत्ति जताते हुए पुलिस को तहरीर दे दी। इसी तहरीर के आधार पर पुलिस ने अब पालिकाध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे उनकी मुश्किल और बढ़ गई है। 

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चप्पलों का जवाब आया, जूतों का क्या...?

बदायूं। इस मामले में जब पालिकाध्यक्ष और पूर्व मंत्री की  'सेक्युलरिज्म' वाली छवि पर सवाल उठना खड़े हुए तो पूर्व मंत्री आबिद रजा ने आनन फानन एक पत्रकार वार्ता का आयोजन कर डाला, जिसमें उन्होंने सफाई दी कि भंडारा मंदिर के बाहर हो रहा था और पालिकाध्यक्ष कपड़़े की चप्पलें पहनी थीं, जिन्हें पहनकर लोग दरगाह में भी चले जाते हैं लेकिन उनके समर्थक कौन से कपड़े के जूते पहने थे, इसका जवाब पूर्व मंत्री के पास नहीं था। और तो और, सफाई में मंदिर के पुजारी समेत कई लोगों का बयान रिकॉर्ड करके भी जारी किया गया। पर, अब जब पुलिस का नोटिस उन्हें मिला है तो देखना ये है कि समर्थकों के स्पोर्ट्स शू आखिरकार किस 'कपड़े' के बने निकलते हैं। 

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मुख्य खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- 

- जूतों के बाद अब 'चप्पलों' ने कराया बवाल...कसमसाए पूर्व मंत्री जब 'सेक्युलरिज्म' पर उठा सवाल

https://sabkibaat.in/post/after-shoes-now-slippers-have-caused-a-ruckus----former-minister-got-upset-when-question-was-raised-on--secularism-

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  • user by संजीव

    इसे भी ईंट से खींचकर मारो जान से

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  • user by Mala

    Good reporting

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  • user by सुधाकर सिंह नोएडा

    रिपोर्टिंग ये होती है। जिन पर रिपोर्ट लिखी उनके नाम तक नहीं दिए। जरूरी नहीं कि महिला ही पीड़ित हो। कभी कभी लड़का पक्ष भी सही होता है। इसका ध्यान रखना बहुत अच्छी बात है। आखिर लड़के पक्ष की भी इज्जत होती है। शाबाश सबकी बात न्यूज

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