652 वर्ष बाद सूर्य, बृहस्पति, शनि और शुक्र बना रहे हैं  करवाचौथ को विशेष

652 वर्ष बाद सूर्य, बृहस्पति, शनि और शुक्र बना रहे हैं करवाचौथ को विशेष

बदायूं। धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु और व्रतराज जैसे प्राचीन हिंदू ग्रंथों में करवाचौथ को कर्क चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन गणेश जी और करवा माता की पूजा की जाती है। इस बार अखंड सौभाग्य का व्रत करवाचौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 

ज्योतिषाचार्य आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, यह व्रत महिलाएं अपने सुहाग के दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना के लिए करती है। इस बार ग्रहों की बात करें तो इस बार करवाचौथ पर ग्रहों का बहुत अच्छा संयोग है जो 652 वर्ष बाद बन रहा

                  -आचार्य राजेश कुमार शर्मा -

है। सूर्य इस समय तुला राशि में हैं। शनि कुम्भ राशि में, गुरु वृष राशि में और शुक्र वृश्चिक राशि में हैं। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 20 अक्टूबर रविवार की शाम सात बजकर 49 मिनट पर चांद निकलने का समय है। वहीं, पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07ः 05 से लेकर 08ः 48 तक रहेगा। उन्होंनें बताया कि कई जगह महिलाएं दोपहर में भी कथा सुन लेती हैं। बस राहुकाल के समय को छोड़ देना चाहिए। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, प्रातः काल सूर्याेदय के साथ भद्रा रहेगी जो 06ः48 तक मान्य है। श्रेष्ठ यह रहेगा कि पूजा इत्यादि के कार्य 06ः48 के बाद ही प्रारंभ करें।

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 पूजा मुहूर्त

 करवा चौथ- रविवार, 20 अक्टूबर 

 पूजन समय- 7ः05 से 8ः48 तक रात्रि 

 चंद्रोदय रात्रि- 07ः 49 बजे (बरेली मंडल)


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