23 साल तक नहीं भेदा जा सका सपा का किला...अब गुटबाजी से बिखरनें लगीं 'ईंटें'

23 साल तक नहीं भेदा जा सका सपा का किला...अब गुटबाजी से बिखरनें लगीं 'ईंटें'

खास बातें- 

- वर्ष 1996 से 2004 तक लगातार सलीम शेरवानी रहे सांसद

- 2009 व 14 के चुनाव में मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र ने हासिल की थी जीत

- इस बार पहले धर्मेंद्र को फिर शिवपाल को दिया टिकट

- कार्यकर्ता असमंजस में, किधर जाएं

सब की बात न्यूज। दो दशक से भी ज्यादा समय से बदायूं की सीट पर सपा का ‌कब्जा बरकरार रहा। लगातार 23 साल तक मुलायम सिंह यादव के इस किले को कोई नहीं भेद पाया। 2019 में इस जीत पर ब्रेक लगा लेकिन अब सपा की अंदरूनी राजनीति और जिले की गुटबाजी के कारण इस इस किले की ईंटें अब बिखरने लगी हैं। पहले धर्मेंद्र यादव और फिर शिवपाल को टिकट देने के कारण कार्यकर्ता असमंजस में हैं कि किधर जाएं। 

गुटबाजी के लिए अभी तक जिले में भाजपा ही बदनाम रही है लेकिन अब सपा पर भी इसका साया पड़ गया है। पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने भाई धर्मेंद्र यादव का टिकट किया तो उन लोगों के चेहरे मुरझा गए जो सपा में तो थे लेकिन अंदर ही अंदर धर्मेंद्र का विरोध कर रहे थे। बताते हैं कि एक विधायक ने तो इसके लिए अखिलेश यादव को पत्र तक लिखकर विरोध जता दिया, जिसके बाद से ही धर्मेंद्र के टिकट पर संकट के बादल छा गए। इसके बाद सपा ने शिवपाल यादव को यहां से प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे धर्मेंद्र विरोधी गुट हावी पड़ता दिखाई दिया तो उनके समर्थकों ने आपत्ति उठानी शुरू कर दी। शिवपाल यादव के प्रत्याशी घोषित होने के बाद अभी तक एक भी बार बदायू न आने और उनके बेटे का कार्यक्रम भी निरस्त होने के कारण अभी तक सपा के जो निष्ठावान कार्यकर्ता हैं वह असमंजस में हैं तो वहीं धर्मेंद्र व शिवपाल के व्यक्तिगत समर्थक व विरोधियों की सांसे इस बात पर लटकी हैं कि टिकट फाइनल किसका होगा।

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अटकलों का दौर जारी, कुछ फाइनल नहीं

- टिकट की घोषणा पर गौर करें तो अभी तक बदायूं सीट से सपा से शिवपाल यादव ही प्रत्याशी हैं क्योंकि अभी कोई दूसरा आदेश नहीं जारी हुआ है। हालांकि बीच में धर्मेंद्र को पुनः प्रत्याशी बनाए जाने की अटकलें शुरू हुईं लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं है। देखना ये है कि इन हालातों में सपा इस बार क्या रिजल्ट लेकर आएगी। 

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जनता में सवाल...तो कैसे जीत पाएगी सपा

- साल 2019 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संघमित्रा मौर्य के जीतने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब जिले का विकास हो जाएगा। उन दिनों की बात करें तो सांसद समेत विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष सभी भाजपा से जुड़े थे। ऐसे में जनता की यह उम्मीद बेमानी भी नहीं थी, लेकिन जिले का कितना विकास हुआ, ये अब जनता से ज्यादा कौन जानता है। ऐसे में लोग कयास लगा रहे थे कि यदि इस बार धर्मेंद्र को टिकट दिया जाता है तो सपा की जीत के चांस ज्यादा हैं। पर, इस गुटबाजी को देखकर नहीं लगता कि उन्हें टिकट मिलने के बाद भी सपा की जीत आसान होगी। 

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एक नजरः अब तक के बदायूं से सपा के सांसद

1996ः सलीम शेरवानी, सपा

1998ः सलीम इकबाल शेरवानी, सपा

1999ः सलीम इकबाल शेरवानी, सपा

2004ः सलीम इकबाल शेरवानी, सपा

2009ः धर्मेंद्र यादव, सपा

2014ः धर्मेंद्र यादव, सपा


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  • user by Anonymous

    भाजपा जनता को पागल समझ रही है। अगले चुनाव में मिलेगा इसका खामियाजा

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  • user by Anirudh sharma

    Ye bjp ke neta hi hogi ji ki lutiya dubayenge

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  • user by Anonymous

    Highway per I riksha Ban hona chahie inhone bahut udham macha Rakha Hai

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