नगर पालिका परिसर में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन, पूर्व मंत्री आबिद रजा और पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने किया सम्मान
शिक्षा के साथ विवेक और संवेदनशीलता विकसित करने पर दिया जोर
शिक्षकों ने बदलते दौर की चुनौतियों और शिक्षा व्यवस्था पर रखे विचार
सबकी बात न्यूज
बदायूं। नगर पालिका परिसर में शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री आबिद रज़ा, विशिष्ट अतिथि पालिकाध्यक्ष फात्मा रज़ा ने शिक्षकों को सम्मानित किया।
पूर्व मंत्री आबिद रजा ने कहा कि शिक्षक समाज में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों का दायित्व केवल विद्यार्थियों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करना भी है। देश की तरक्की में शिक्षकों का बहुत बड़ा
योगदान है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ मानवता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में मजहब और बिरादरी के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि इंसानियत की राजनीति होनी चाहिए। तभी देश सही मायने में तरक्की कर सकेगा।
पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने कहा कि वह शिक्षकों का बहुत सम्मान करती हैं। आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें शिक्षा और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने शिक्षक सम्मान समारोह में उनके आह्वान पर पहुंचे सभी शिक्षकों का तहेदिल से आभार व्यक्त किया।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे गुलफाम सिंह यादव ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां हैं। तकनीकी बदलाव, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों ने बच्चों के लिए ज्ञान के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन इसके साथ भ्रम और गलत जानकारी की चुनौती भी बढ़ी है। शिक्षकों को बच्चों को जानकारी देने के साथ ही विवेक का इस्तेमाल करना भी सिखाना चाहिए, ताकि वे सही जानकारी को पहचानकर उसका सकारात्मक उपयोग कर सकें।
सेवानिवृत्त शिक्षक राजीव राज ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा बेहद समृद्ध रही है। यहां ज्ञान को केवल रोजगार का माध्यम नहीं माना गया, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण विकास से जोड़कर देखा गया। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भी ऐसे तत्वों को अपनाने की जरूरत है, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने में मदद करें। सेवानिवृत्त शिक्षक अनवार उद्दीन ने भी विचार प्रकट किए।
समारोह में प्रोफेसर कमला माहेश्वरी, मास्टर जमील, आचार्य प्रताप सिंह, ममता नौगरिया, प्राचार्या सुषमा कथूरिया, पूर्व प्राचार्य खिजर साहब, पूर्व प्राचार्य अब्दुल सुबूर, मजहर शब्बीर, मोहम्मद मियां, सीमा यादव, शहनाज बानो, कन्हैया लाल, मार्क्स नजम, वेदमित्र आर्य आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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