बदायूं की इस मेंथा फैक्ट्री में पड़ी थीं तीन लाशें...क्या मालिक ने कर दी हत्या ?
एक मृतक के परिवार वालों ने मालिक मनोज गोयल समेत उनके मालिक और मैनेजर के खिलाफ लिखाई रिपोर्ट
एक बार फिर चर्चा में आई उझानी की भारत मिंट केमिकल लिमिटेड मेंथा फैक्ट्री
पिछली साल मई में हुए भीषण अग्निकांड में जिंदा जल गया था एक मजदूर
बदायूं। उझानी स्थित मेंथा फैक्ट्री में मंगलवार सुबह तीन गार्ड्स की लाशें पड़ी मिलीं। परिवार वालों ने फैक्ट्री मालिक पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए मालिक समेत तीन लोगों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

ये मामला उझानी थाना क्षेत्र के गांव कुड़ा नरसिंहपुर स्थित भारत मिंट केमिकल लिमिटेड फैक्ट्री का है। इसके मालिक मनोज गोयल हैं। इसी फैक्ट्री में पिछले साल आग भीषण लगी थी, जिसमें एक मजदूर की जलकर मौत हो गई थी। कई दिनों तक उसके शव का पता ही नहीं चला था, जिसके बाद काफी हंगामा और राजनीति हुई थी। हालांकि उसके बाद मामले में लीपापोती कर दी गई।
मंगलवार को एक बार फिर यह फैक्ट्री सुर्खियों में आ गई। दरअसल, फैक्ट्री में 30 वर्षीय जोगेंद्र यादव, 25 वर्षीय भानु और 27 वर्षीय विवेक यादव काम करते थे। बताया जाता है कि रात की ड्यूटी के बाद मंगलवार सुबह जोगेंद्र के परिवार वालों ने
उसे कॉल की थी लेकिन जोगेंद्र का फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद परिवार वाले वहां पहुंचे तो केबिन में तीनों जमीन पर उल्टे सीधे पड़े थे। उन्होंने उन्हें झंझोड़कर देखा लेकिन उनके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। इसके बाद वहां चीखपुकार मच गई, जिसे सुनकर वहां भीड़ एकत्र होने लगी।
जोगेंद्र के परिवार वालों के अनुसार, उनके बेटे समेत तीनों मृतकों के शरीर पर जमीन पर घसीटे जाने के निशान मौजूद हैं। उनका आरोप था कि फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल ने रात में उनकी हत्या कर दी और उनकी लाशों को केबिन में डाल दिया गया। इस साजिश में मनोज गोयल के भाई नितेश गोयल और फैक्ट्री का मैनेजर राकेश भी शामिल है। हालांकि पुलिस के अनुसार, तीनो लोग रात में अंगीठी जलाकर सो गए थे। सम्भवतः दम घुटने के कारण उनकी मौत हुई है। हालांकि मृत्यु का सही कारण जानने के लए शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में परिवार वालों की तहरीर पर फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल, उनके भाई नितेश गोयल, मैनेजर राकेश समेत कुछ अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है।
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दम घुटा तो जमीन पर कैसे पहुंची लाशें
बदायूं। इस मामले में अभी तक जो बातें सामने आई हैं, उसके अनुसार, तीनों लोगों के शव सुबह जमीन पर पड़े थे जबकि जिस केबिन में वे लेटे थे, उसमें दो तख्त और एक चारपाई पड़ी थी। यदि दम घुटने की बात को सही मान लें तो तीनों के शव तख्त और चारपाई पर मिलने चाहिए थे। इसके अलावा वहां अंगीठी की राख भी इतनी नहीं मिली है। मृतकों के परिवार वालों की मानें तो तीनों की पीट पर घसीटे जाने या चोट जैसे निशान भी हैं। हालांकि सत्यता का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही चल सकेगा।
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सांसद आदित्य यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा
बदायूं। इस घटना के बाद सांसद आदित्य यादव ने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि मेंथा फैक्ट्री में हुए हादसे में जोगेंद्र यादव, भानु यादव और विवेक यादव की दर्दनाक मौत अतयंत दुखद और शर्मनाक है। फैक्ट्री बंद होने के आदेश के बावजूद काम कैसे कराया जा रहा था। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक मिलीभगत और भाजपा सरकार की ढीली निगरानी का परिणाम है। प्रदेश में सुरक्षा

और कानून व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि अवैध रूप से चल रही फैक्ट्री पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और मजदूरों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा? हम मांग करते हैं कि मृतकों के परिजनों को तत्काल पर्याप्त मुआवज़ा दिया जाए और इस हादसे के लिए जिम्मेदार फैक्ट्री मालिकों तथा लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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