बदायूं भाजपा के इस पूर्व पदाधिकारी समेत तीन लोग काट आए जेल की सजा...14 साल पुराना है मामला
कोर्ट में आत्मसमर्पण किया, डीजे ने जमानत अर्जी कर दी खारिज, सरोज डिकेम फैक्ट्री पर कब्जे का प्रकरण
आरोपित बोले- हमारे साथ हुआ था धोखा, नोड्यूज देखकर कराया था बैनामा
सबकी बात न्यूज
बदायूं। भारतीय जनता पार्टी की बदायूं की इकाई से जुड़े रह चुके पूर्व नगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता उर्फ बिट्टन समेत तीन लोग 14 साल पुराने मामले में एक माह की जेल काट आए और किसी को भनक तक नहीं लगी। जिला जज की अदालत ने बरसों पुराने सरोज डिकेम फैक्ट्री से जुड़े मामले को गंभीर बताते हुए आत्मसमर्पण करने गए भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष समेत अमित महाजन व संजय साहू की जमानत खारिज करते हुए करीब एक माह पहले यह फैसला सुनाया था। 15 दिनों में अमित गुप्ता की जमानत हो गई जबकि भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता और संजय साहू को पिछले दिनों ही जमानत मिली है।
मामला करीब 14 साल पुराना है। नौ दिसंबर 2012 का सिविल लाइंस के तत्कालीन एसओ सत्यदेव सिंह द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा गया था कि दो दिन पहले उन्हें सूचना मिली कि बंद पड़ी सरोज डिकेम फैक्ट्री में तोड़फोड़ करके कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है जबकि फैक्ट्री तहसील प्रशासन द्वारा कुर्क की जा चुकी है। एसओ ने मौके पर मौजूद एसआई से तोड़फोड़ रुकवाने को कहा तो एसआई द्वारा बताया गया कि राजेंद्र मथुरिया, मनोज गुप्ता व बशीर खान फौजी समेत 20-25 लोग फैक्ट्री पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं और उनके पास हथियार भी हैं। मना करने पर भी नहीं मान रहे हैं। एसओ जब वहां पहुंचे तो सभी लोग वहां से भाग गए थे। एसओ द्वारा उक्त तीनो समेत संजय साहू, अमित गुप्ता, कंचनलता आदि कुछ अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराकर चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी गई। बता दें कि कंचनलता कई साल पहले डाकघर में हुए करोड़ों रुपये के गबन के आरोपित चमन की पत्नी हैं।
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आरोपितों के वकील और जिला शासकीय अधिवक्ता का कथन
बदायूं। विगत 29 जून को इस मामले में कोर्ट में सभी आरोपितों के वकील द्वारा तर्क दिया गया कि फैक्ट्री की एकमात्र मालिक कंचनलता थीं और उनके द्वारा नोड्यूज दिखाने पर ही आरोपितों ने यह फैक्ट्री उनसे बैनामा कराकर खरीदी थी। ऐसे में उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। इसके विपरीत जिला शासकीय अधिवक्ता ने यह तर्क दिया कि क्रेता का यह कर्तव्य होता है कि वह जिस संपत्ति को खरीद रहा है, उसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करे। यह भी कहा गया कि आरोपित दबंग और राजनीति में असर रखने वाले लोग हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद उनके खिलाफ कोर्ट ने समन जारी किए लेकिन वे गैरहाजिर रहे। कोर्ट द्वारा गैर जमानती वारंट जारी करने के बाद एसएसपी को तामील कराए गए, लेकिन आरोपित फिर भी कोर्ट नहीं आए। सालों तक कोर्ट से गैरहाजिर रहकर आरोपितों ने कार्रवाई को बाधित किया। उनके अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र जिला कोर्ट और हाईकोर्ट से भी निरस्त हो चुके हैं और वे जमानत के पात्र नहीं हैं। इस पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक संगल ने मनोज गुप्ता, अमित गुप्ता और संजय साहू की जमानत निरस्त करते हुए उन्हें जेल भेज दिया था।
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कोर्ट में दबी पड़ी थी फाइल
बदायूं। बताया जाता है कि तब से अब तक इस मामले की फाइल कोर्ट में दबी पड़ी थी। सालों बाद जब इसका जिन्न निकला तो आरोपितों ने कोर्ट में सरेंडर किया लेकिन जिला न्यायाधीश ने उनके जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त करते हुए कार्रवाई कर दी। इस संबंध में आरोपित अमित गुप्ता ने बताया कि उनकी करीब 15 दिन में ही जमानत हो गई थी। अन्य दोनों को एक महीना लग गया। फिलहाल तीनों लोग जेल से निकल आए हैं। बोले- हमने कोर्ट की तारीखें नहीं की थी। बहुत दिनों का मामला था, निपटाना तो था ही। कभी न कभी दिक्कत होती इसलिए कोर्ट का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने कहा कि फ्रॉड तो हमारे साथ हुआ था। कंचनलता के पास नोड्यूज था इसलिए हमने संपत्ति खरीदी थी। इधर, भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने बताया कि खुद हमारे साथ धोखा हुआ है। हमने नोड्यूज के आधार पर संपत्ति खरीदी थी और बैनामा कराया था लेकिन नोड्यूज जारी करने वाले तहसील कर्मियों को सिर्फ निलंबित करने की कार्रवाई की गई।
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भाजपाइयों ने भी 'सीक्रेट' रखा प्रकरण
बदायूं। अभी इस मामले में राजेंद्र मथुरिया समेत दो लोग और आरोपित हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में उन पर भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। इधर, लोगों का कहना है कि जेल में पूर्व नगर अध्यक्ष समेत अन्य आरोपितों से मिलने भाजपा के कई बड़े नेता और जनप्रतिनिधि भी पहुंचे लेकिन उन्होंने किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी।
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