देवगुरु बृहस्पति ने किया राशि परिवर्तन...आप भी जानें अपनी राशि पर प्रभाव

देवगुरु बृहस्पति ने किया राशि परिवर्तन...आप भी जानें अपनी राशि पर प्रभाव

बदायूं। एक मई यानी बुधवार को देवगुरु बृहस्पति मेष राशि से वृष राशि में आ गए हैं। गुरु लगभग 13 मास एक राशि में रहते है इस प्रकार लगभग 13 मास के वाद मेष राशि से वृष राशि में आए हैं। अब वह लगभग 13 मास इसी वृष राशि में गोचर करेंगे। वर्ष की बात करें तो लगभग 13 वर्ष बाद वह पुनः वृष राशि में आए हैं। इसका प्रभाव सभी राशियों पर अलग अलग होगा। आइये पंडित गिरीश शर्मा से जानते हैं कि किस राशि पर इसका क्या होगा प्रभाव-


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गुरु का वृष राशि में प्रवेश - एक मई-24

रहेंगे- 14 मई-25 तक (लगभग)

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मेष राशि - दूसरे घर में रहेंगे

- वाणी में मधुरता, शक्ति, आकर्षण बढ़ेगा, धन बढ़ेगा साथ ही व्यय भी बढ़ेगा कोर्ट, चुनाव, शत्रुओं पर विजय मिलेगी। ऋण रोग से मुक्ति मिलेगी, समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। नया ज्ञान, ऊर्जा मिलेगी कार्यक्षेत्र में सुधार होगा। परिवार में जीव, धन वृद्धि होगी। 

वृष राशि - लग्न में रहेंगे 

- धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। धार्मिक यात्राएं होती रहंेगी। शिक्षा, संतान, ज्ञान विज्ञान, तर्कशक्ति निर्णय शक्ति प्रारब्ध के मामले में शुभता बढ़ेगी। नए ज्ञान में वृद्धि होगी। व्यापार व वैवाहिक मामलों में शुभता  बढ़ेगी। भाग्य में वृद्धि होगी। परदेश से संबंध बनेंगे और लाभ होगा। 

मिथुन   -12 वें भाव में रहेंगे 

-व्यापार, दांपत्य जीवन, सम्मान, कार्यक्षेत्र, प्रतिष्ठा आहत हो सकती है। चुनाव,कोर्ट, प्रतियोगिता। शत्रुओं पर विजय होगी। परदेश गमन होगा, ऐसा करने से लाभ भी होगा। शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। खर्चे बढ़ेंगे दूर की यात्रा होगी। जीवन में बड़ी उथल पुथल होगी। 

कर्क - ग्यारहवें घर में रहेंगे 

- ऋण, रोग, शत्रु, चुनाव प्रतियोगिता, इन मामलो में शुभाशुभ घटनाएं घटेंगी। भाग्य बलवान होगा, जिससे भाग्य के बल पर काम बनेंगे। संतान, शिक्षा, बुद्धि विवेक को शुभता मिलेगी नया ज्ञान मिलेगा। सट्टा लॉटरी, शेयर मार्किट आदि संबंधित तरीकों से धनार्जन होगा धनकोष बढ़ेगा। वैवाहिक व्यापार मामलो में शुभता बढ़ेगी, भाई बहिनों को शुभता मिलेगी। 

सिंह - दशम भाव में 

- घर परिवार, धन, वाणी, सांसारिक सुख (मकान, वाहन, जमीन आदि) बढ़ेंगे।  ऋण, रोग, शत्रु की समस्या बन सकती है। बनते कार्यों में बाधाएं आएंगी फिर काम पूर्ण होगें। कार्यक्षेत्र में सुधार होगा। प्रसिद्धि बढ़ेगी। समाज जनता द्वारा हैसियत बढ़ेगी। परदेश से संबंध मजबूत होगे। 

कन्या - नवम भाव में

- पूर्व की अपेक्षा भाग्य वृद्धि होगी, जिससे भाग्य के बल पर काम बनेंगे। भाई बहिनों को शुभता बढ़ेगी। समाज में सम्मान बढ़ेगा। शिक्षा, ज्ञान, विज्ञान, बौद्धिक प्रतिभा को शुभता बढ़ेगी। संतान को शुभता रहेगी। तर्क शक्ति निर्णय शक्ति मजबूत बनेगी। धर्मकर्म में रुचि बढ़ेगी। धार्मिक कार्य व यात्राएं हो सकती हैं। 

तुला - अष्टम भाव में

- पारिवारिक भार, समस्याएं बढ़ेगी। ऋण, रोग, शत्रु बढ़ेंगे। धर्मकर्म में रुचि कम होगी। प्रतिभा ,शिक्षा का उपयोग, लाभ कम होगा लेकिन धन आता रहेगा। सामाजिकता में कमी होगी, स्थानांतरण होगा। समाज में महत्व कम होगा प्रॉपर्टी बढ़ेगी। 

वृश्चिक - सप्तम भाव में

- सम्मान पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धर्म कर्म में रुचि बढ़ेगी। धार्मिकता बढ़ेगी और धार्मिक कार्य होंगे। धार्मिक यात्राएं होंगी, भाई बहनों के मामले में सुधार होगा। आय में वृद्धि होगी और पिछले संघर्ष से मुक्ति मिलेगी। संतान, धन मामलो में सुधार होगा। नया ज्ञान नई बुद्धि नई ऊर्जा मिलेगी। भाग्य का बड़ा साथ मिलेगा। 

धनु - षष्ठम भाव में 

- सम्मान पद प्रतिष्ठा को जूझना होगा स्वास्थ्य डिस्टर्ब होगा। अनचाही जगह पर स्थानांतरण होगा। खास लोगो से वाद विवाद संभव है। माता पिता का स्वास्थ डिस्टर्ब होगा। मकान वाहन मामलों में उलझन बढ़ेगी। काम धन्धे ठीक रहेंगे। परदेश गमन होगा। विरोधी बढ़ेंगे। 

मकर - पंचम भाव में 

- सम्मान, धन बढ़ेगा, भाग्य बलवान होगा, आय बढ़ेगी। नए लोगो से संबंध बनेंगे। नया ज्ञान, नई ऊर्जा मिलेगी। समस्याओं का स्वतः समाधान होता रहेगा। धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। धार्मिक यात्राएं होंगी। धार्मिक कार्य होगे। दांपत्य जीवन में शुभता बढ़ेगी। प्रारब्ध बहुत बलवान होगा जिससे सफलताएं मिलेंगी। नए लोगों से जुड़ाव होगा जो शुभ फलदायक होगा। 

कुंभ- चौथे भाव में 

- कार्यक्षेत्र में सुधार होगा। परदेश यात्रा से लाभ होगा। नया ज्ञान, नई विद्या, नई ऊर्जा मिलेगी। धार्मिक टच रहने से अधिक सफलताएं। मिलेंगी मनचाही जगह पर ट्रांसफर होगा। 

मीन - तृतीय में सामान्य से अधिक शुभ 

- वैवाहिक मामलों में शुभता बढ़ेगी। धार्मिकता बढ़ेगी। भाग्य बलवान रहने से भाग्य के बल पर समस्याओं का समाधान होगा और सफलताएं मिलेंगी। धनकोष आय में वृद्धि होगी। सामाजिकता, दानशीलता बढ़ेगी। खुद के साहस पराक्रम से कार्य सिद्धि होगी।

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गुरु को शुभ करके और अधिक लाभ लेने को उपाय ,,,,,

-धार्मिक बनें, नित्य ईश्वर, गुरु, माता पिता, ब्राह्मण और गाय की सेवा करें। 

- नशे से बचें और शुद्ध शाकाहारी बने

- नित्य योग व्यायाम करे। प्रातः भ्रमण करें। 

-नित्य पीला चंदन या हल्दी गंगाजल से युक्त ,नाभि माथा जीभ पर लगाएं

- पीपल पर सुबह दूध, चीनी, हल्दी, केसर अर्पित करें। 

- सक्षम जन बृहस्पतदेव का व्रत रखें और पूजा करें। 

- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 

- गुरुवार को दान करें। पीले केले, चने की दाल, हल्दी, शहद, धर्मग्रंथ आदि और दक्षिणा दें। 

- गुरु मंत्र का जप करें। गुरु की सेवा करें। दान दक्षिणा दें और आशीष लें। 


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