दिल्ली पब्लिक स्कूल में भव्य रूप से मनाया गया हिन्दी पत्रकारिता दिवस समारोह
जिले भर के पत्रकार हुए एकत्र, 60 वर्ष की आयु पार कर चुके पत्रकारों का हुआ अभिनंदन
सबकी बात न्यूज
बदायूं। दिल्ली पब्लिक स्कूल में हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकारों और साहित्यकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया रिपोर्टर एसोसिएशन, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन, उप्र श्रमजीवी पत्रकार यूनियन एवं नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स की बदायूं इकाई द्वारा किया गया।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा एवं मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार संजय रुस्तगी एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि बीएल वर्मा ने कहा कि पत्रकार समाज का सजग प्रहरी होता है। वह निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ जनहित के मुद्दों को सामने लाकर समाज और प्रशासन के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में पत्रकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। ऐसे में उनके योगदान को सम्मानित करना समाज का कर्तव्य है। उन्होंने सभी पत्रकारों को हिंदी पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्य वक्ता मुरादाबाद से आये वरिष्ठ पत्रकार संजय रुस्तगी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं। यह दिन हिन्दी पत्रकारिता के विकास में पत्रकारों, लेखकों, साहित्यकारों के योगदान को स्मरण करने और उन्हें सम्मान देने के लिए समर्पित है।
सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि यह दिन केवल पत्रकारों का नहीं, बल्कि उन मूल्यों का उत्सव है जिन पर लोकतंत्र की नींव टिकी है। जनसरोकार, सत्य, निष्पक्षता और समाज के प्रति जवाबदेही जैसे सिद्धांतों को मजबूत करने में हिन्दी पत्रकारिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह बब्बू ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिन्दी पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं रही, उसने जनजागरण का माध्यम बनकर लोगों में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। बिल्सी विधायक हरीश शाक्य ने कहा कि आज भी गांव, कस्बों और छोटे शहरों की समस्याओं को सामने लाने में स्थानीय पत्रकारों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। पत्रकार का काम केवल सूचना देना नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच कर सत्य को सामने लाना भी है।
वरिष्ठ साहित्यकार अशोक खुराना ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिन्दी पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं रही। उसने जनजागरण का माध्यम बनकर लोगों में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। इतिहास गवाह है कि पत्रकारिता ने समाज को जागरूक करने, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वरिष्ठ पत्रकार शरद शंखधार ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता दिवस का इतिहास 30 मई 1826 से जुड़ा है।
दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र सारांश भारद्वाज ने कहा कि डिजिटल मीडिया के विस्तार ने युवाओं के लिए पत्रकारिता के नए अवसर खोले हैं। मोबाइल पत्रकारिता, डेटा पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट निर्माण जैसे नए क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। वहीं, प्रतिस्पर्धा और त्वरित खबरों की दौड़ में गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे समय में पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को बनाए रखना और तथ्यों पर आधारित खबरें प्रस्तुत करना सबसे महत्वपूर्ण है।
इस मौके पर 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पत्रकारों का अभिनन्दन समेत समाज और पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट, निष्पक्ष और निर्भीक योगदान देने वाले पूर्व एवं वर्तमान 48 वरिष्ठ पत्रकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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