कहां गया बदायूं का डायवर्जन, रोते रहे परीक्षा छूटने वाले परीक्षार्थी, बारिश ने खोल दी बदायूं के नेताओं की पोल
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बदायूं। सियासत की चमक और जनता के आंसुओं का यह अनोखा कॉकटेल देखना हो, तो बदायूं पर गौर कर लीजिए। फिलहाल मामला यह है कि भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य का बदायूं में आगमन होना था, और जब हुजूर कदम रख रहे हों, तो भला नियम-कानूनों की क्या मजाल जो उनके आड़े आ जाएं।
दरअसल टीईटी के मद्देनजर प्रशासन ने बकायदा कागजों पर एक रूट डायवर्जन का नक्शा खींचा था, जिसमे बड़े वाहनों का रूट डायवर्ट किया गया था ताकि टीईटी के 'बेचारे' परीक्षार्थी समय पर सेंटर पहुंच सकें, लेकिन जैसे ही नेताजी का काफिला चमचमाता हुआ निकला, वह डायवर्जन का नियम भी उसी पानी में बह गया जिसे नेताजी के समर्थक विकास की गंगा कह रहे थे। हालांकि प्रदेश उपाध्यक्ष का काफिला बरेली से होकर श्यामनगर तक आया, लेकिन इसके कारण तमाम वाहन फंस गए और रूट डायवर्जन का भी कोई लाभ नहीं हुआ।
इधर इस रोड शो का रंग भी बड़ा निराला था। वे भाजपाई भी जो अंदर ही अंदर दुर्विजय सिंह शाक्य के विरोधी माने जाते हैं, वह भी खींसे निपोरते हुए फूल मालाएं लिए खड़े नजर आए। आखिर मामला दिल का नहीं, सीधे कुर्सी का जो ठहरा। खैर, इस सियासी ड्रामे का असली क्लाइमेक्स तब देखने को मिला जब भारी गाड़ियों का यह काफिला सड़कों पर बह रही 'विकास की गंगा' यानी जलभराव को चीरते हुए आगे बढ़ा।
(देखिये वीडियो) -
नेताजी की गाड़ियों के चौड़े और महंगे टायर तो उस जलभराव को लांघकर मजे से निकल गए, लेकिन पीछे छोड़ गए उन बच्चों की चीखें, जिनकी साल भर की मेहनत जाम के झाम में हमेशा के लिए फंस गई। जिन परीक्षार्थियों के आंखों में सरकारी नौकरी के सपने थे, वे परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े होकर रोते रहे, पर सिस्टम और नेताओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अब जनता का यह सोचना ही बेवकूफी है कि क्या नियम सबके लिए एक जैसे होते हैं?
क्या जिन परीक्षार्थियों की परीक्षा नेताजी के जाम के कारण छूटी, उन्हें क्या दोबारा मौका मिलेगा क्या जिस जलभराव से होकर नेताजी की गाड़ियों का काफिला होकर गुजरा, उस जलभराव से होकर आम जनता तो रोजाना निकलती है क्यों नेताओं को यह परेशानी गाड़ियों के अंदर से दिखाई नहीं देती।
खैर...सवाल बहुत हैं, पर उनके जवाब न नेताओं के पास हैं और न ही सिस्टम के।
इसलिए ज्यादा सोचिए मत, इस सियासी तमाशे को देखिए, मन ही मन सिस्टम को दो-चार गालियां दीजिए, और अगले दिन फिर से उसी जलभराव वाली सड़क पर अपनी किस्मत को कोसते हुए काम पर निकल जाइए, क्योंकि साहेब, बदायूं में नेताजी अमर हैं और जनता का दर्द परमानेंट।
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