कंपनी की मैस में कर्मचारी को बुलाकर मंगाया था पानी, बोतल में भरा पेय गटकते ही बेहोश हो गए विकास सिंह
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पटियाला। हादसे किसी की भी जिंदगी में हो सकते हैं लेकिन कुछ हादसे जिंदगी भर के जख्म छोड़ जाते हैं। डेराबस्सी के एक व्यक्ति के साथ हुए हादसे ने भी पूरे परिवार की जिंदगी को उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया, जहां जीवन जिंदगी और मौत के बीच उलझकर रह गया है।
मूलरूप से डेराबस्सी निवासी विकास सिंह पेशे से इंजीनियर है और करीब तीन साल से पटियाला की रेडिएंट टैक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत थे। परिवार वालों के अनुसार, 20 मार्च 2026 को फैक्ट्री की मैस में खाना खाने के दौरान विकास को प्यास लगी। उन्होंने कैंटीन कर्मचारी से पीने के लिए पानी मांगा तो उन्हें ड्यू की एक बोतल लाकर दे दी गई। विकास ने जैसे ही उसे पानी समझकर पिया, उनके गले में तेज जलन होने लगी। उन्होंने उस कर्मचारी से पूछा भी कि उसने उन्हें यह क्या पिला दिया, उनका गला जल रहा है लेकिन इतना कहते ही वह बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल पटियाला के अमर अस्पताल ले जाया गया जहां परिवार के अनुसार डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत देखते हुए केमिकल/एसिड के सेवन की आशंका जताई। इसके बाद पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई।
परिवार का कहना है कि कंपनी की ओर से 75 हजार की मेडिकल मदद देने के बाद मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसके बाद विकास का इलाज डेराबस्सी के इंडस हॉस्पिटल के आईसीयू में करीब दो महीने चला लेकिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें पीजीआई लाया गया। यहां करीब 20 दिन उनका इलाज चला और कई बड़े ऑपरेशन भी हुए लेकिन अब उन्हें डॉक्टरों ने विकास को ब्रेन-डेड बता दिया है।
परिवार वालों की मानें तो अब तक करीब 15 लाख से अधिक का इलाज खर्च हो चुका है। एक तरफ जिंदगी बचाने की जंग है, दूसरी तरफ परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुका है। विकास अपनी पत्नी सुषमा और महज नौ साल की बेटी के साथ अपना घर चला रहे थे। इसी बीच परिवार ने बेटी का डेराबस्सी के स्कूल से नाम भी हटवा लिया था और पत्नी ने नौकरी छोड़ दी थी, क्योंकि वे सभी पटियाला शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन परिवार को क्या पता था कि नई जिंदगी शुरू करने से पहले ही उनकी दुनिया उजड़ जाएगी।
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सबसे बड़ा सवाल, जिम्मेदारी किसकी?
- परिवार का आरोप है कि जिस कंपनी के परिसर में यह घटना हुई, वहां कर्मचारी की सुरक्षा और कैंटीन या मैस की व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी? अगर पानी की बोतल में वास्तव में कोई हानिकारक केमिकल था, तो वह वहां तक कैसे पहुंचा? परिवार का यह भी आरोप है कि घटना के बाद कंपनी ने पिछले करीब पांच महीनों में उनकी सुध नहीं ली और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया। आज विकास अस्पताल में जिंदगी की आखिरी सांसों के बीच इंसाफ की उम्मीद लगाए हुए हैं। परिवार का कहना है कि वह किसी निर्दाेष व्यक्ति को दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग है कि विकास का पूरा और आगे का मेडिकल खर्च कंपनी वहन करे। अब तक परिवार द्वारा किए गए इलाज के खर्च में उचित आर्थिक सहायता/प्रतिपूर्ति दी जाए। परिवार को उसकी जीवनभर की कमाई और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
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