बदायूं की सियासत का नया 'गेमप्लान'...तो क्या एक तीर से दो शिकार करने की फिराक में है यह विधायक!
2027 जीतने की के लिए सियासी ड्रामा तो नहीं यह, राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा
सबकी बात न्यूज
बदायूं। राजनीति की पिच पर कब कौन सा शॉट खेला जाए और कौन सा खिलाड़ी किस पाले में बैटिंग करने लगे, यह बड़े-बड़े धुरंधर भी नहीं भांप पाते। बदायूं जिले की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा ही 'मास्टरस्ट्रोक' या कहें कि पर्दे के पीछे का ड्रामा चर्चा का विषय बना हुआ है। कहा जाता है कि सियासत में कोई किसी का सगा नहीं होता और चालें ऐसी चली जाती हैं कि अच्छे-अच्छे चाणक्य भी चक्कर में पड़ जाएं। जिले के एक विधानसभा क्षेत्र में इस समय कुछ ऐसा ही 'राजनीतिक रायता' फैला है, जिसकी महक पूरे गलियारे में गपशप का मसाला बन चुकी है।
मामला यहां के एक भाजपा विधायक से जुड़ा है। चर्चाओं का बाजार इस बात को लेकर गर्म है कि विधायक के बेहद करीबी माने जाने वाले एक नेता जी ने हाल ही में भगवा चोला उतारकर समाजवादी पार्टी का दामन थामा है। मजे की बात यह है कि इन नेताजी के परिवार की दो महिलाएं अब प्रशासक हैं। दोनों को बनवाने में भी विधायक का पूरा सहयोग रहा है लेकिन विधायक का खास माने जाने वाले इस कुनबे के नेता जी अचानक पाला बदलकर चर्चाओं के शिखर पर पहुंच गए हैं। सोशल मीडिया पर भी यह राजनीतिक पलटी खूब तैर रही है।
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2024 का 'अंडरग्राउंड' खेल और 2027 की फुलप्रूफ प्लानिंग !
बदायूं। सियासी गलियारों में सुगबुगाहट है कि यह पाला बदलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी स्क्रिप्ट का हिस्सा है। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यह चर्चा जोरों पर थी कि विधायक ने अपनी ही पार्टी यानी भाजपा के प्रत्याशी के बजाय साइकिल यानी सपा वाले को अंदरखाने से आशीर्वाद दे दिया था। नतीजा यह निकला कि सपा का सांसद भी चुनकर दिल्ली पहुंच गया। अब चूंकि 2027 के विधानसभा रण का बिगुल बज चुका है और विधायक जी खुद को टिकट की रेस में सबसे आगे मान रहे हैं, तो उन्होंने अपने विरोधियों को चित करने के लिए एक गजब की बिसात बिछा दी है। चर्चा है कि विधायक जी ने अपने ही खास नेताजी को विरोधी खेमे में प्लांट किया है। डील यह तय हुई है कि सांसद की मदद से उस खास व्यक्ति को 2027 में उसी विधानसभा से सपा का टिकट दिलाया जाए।
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एक तीर से दो शिकार का 'ब्रह्मास्त्र'
बदायूं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह चाल कामयाब हो गई, तो विधायक जी का खेल बन जाएगा। फॉर्मूला सीधा है कि अगर विधायक जी को भाजपा से टिकट मिल जाता है और उनके खास को सपा से, तो मैदान में कोई मजबूत विरोधी नहीं बल्कि एक डमी कैंडिडेट होगा। ऐसे में विधायक जी की नैया बिना किसी रोक-टोक के सीधे पार हो जाएगी। ऐसे में एक तो सपा सांसद को पुराना अहसान चुकाने का रिटर्न गिफ्ट मिल जाएगा, और दूसरा, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए रास्ता एकदम मक्खन जैसा साफ हो जाएगा। हालांकि इस सियासी ड्रामे में कितनी सच्चाई है और कितनी अफवाह, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन चाय की चुस्कियों के साथ बदायूं के राजनीतिक चौपालों पर इस मास्टरप्लान की चर्चा सबसे चटपटी और मसालेदार बनी हुई है।
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