सपा में अध्यक्षों की 'दुकानें' बंद...तो क्या जिलाध्यक्ष के 'घर' से निकल जाएगी शेखूपुर सीट!

सपा में अध्यक्षों की 'दुकानें' बंद...तो क्या जिलाध्यक्ष के 'घर' से निकल जाएगी शेखूपुर सीट!

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश साफ कह चुके-किसी भी जिलाध्यक्ष या विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष को नहीं मिलेगा टिकट

यदि चुनाव लड़ना चाहते हैं तो पहले देना होगा इस्तीफा, फिर पार्टी हाईकमान करेगा विचार, खुद से प्रत्याशी न करे घोषित

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बदायूं। विधानसभा चुनाव में भले ही अभी वक्त हो, लेकिन राजनीति की 'शतरंज' खुल गई है और मोहरे सजाए जाने लगे हैं। तैयारी भले ही बाहर से न दिख रही हो लेकिन अंदर से कमर कसी जाने लगी है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिलाध्यक्षों और विधानसभा क्षेत्र अध्यक्षों के चुनाव न लड़ने के बयान के बाद उन अध्यक्षों पर संकट छा गया है जो खुद चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं या फिर किसी को टिकट दिलाने के लिए 'टोकन मनी' ले रखी है। कुल मिलाकर यूं भी कहा जा सकता है कि अखिलेश यादव ने अध्यक्षों की 'दुकानें' बंद कर दी हैं। बदायूं की बात करें तो इसका असर शेखूपुर विधानसभा पर ही पडता दिख़ रहा है। 

कुछ ही दिन पहले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर लखनऊ में हुई सपा की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिलाध्यक्षों और विधानसभा क्षेत्र अध्यक्षों से साफ कह दिया कि अगर किसी अध्यक्ष को चुनाव लड़ना है तो वह अपने पद से इस्तीफा दे दे। इस्तीफा देने का भी यह मतलब नहीं है कि उसका टिकट पक्का हो गया। इस पर पार्टी हाईकमान द्वारा विचार किया जाएगा और उसके बाद ही कोई निर्णय लियाा जाएगा। अखिलेश ने यह भी कहा कि कोई भी अध्यक्ष खुद से अपने आप को प्रत्याशी घोषित न करे और न ही किसी को टिकट दिलाने का ठेका ले। 

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परिवार पर लागू तो हिमांशु यादव का पत्ता होगा साफ?

बदायूं। पार्टी सूत्र बताते हैं कि अखिलेश यादव ने अधिकारिक रूप से तो यह बात जिलाध्यक्षों और विधानसभा क्षेत्र अध्यक्षों के लिए ही की है, लेकिन यह उनके परिवार वालों पर भी लागू होगी। यानी किसी अध्यक्ष का कोई परिजन भी चुनाव में टिकट नहीं पाएगा। अब बात बदायूं जिले की करें तो छह विधानसभा क्षेत्रों में एक शेखूपुर विधानसभा ऐसी है जहां जिलाध्यक्ष आशीष यादव के बेटे हिमांशु यादव विधायक हैं। यानी, यदि परिवार वालों की बात सही है तो इस बार सपा ने उनका पत्ता लगभग साफ ही कर दिया है। हालांकि ऐसे संकेत कुछ माह पहले ही मिलने लगे थे कि इस बार शेखूपुर से वर्तमान विधायक का चुनाव लड़ना मुश्किल ही होगा।

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...तो क्या जिलाध्यक्ष को 'बख्शने' का ये था कारण?

बदायूं। पिछले साल अक्तूबर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बदायूं समेत कुछ जिलो की सभी कार्यकारिणी को भंग करते हुए सभी पदाधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया था। बताया जाता है कि इसमें केवल बदायूं जिलाध्यक्ष को छोड़ा गया था। ऐसे में अब यह भी माना जा रहा है कि बदायूं जिलाध्यक्ष आशीष यादव व उनके परिवार के किसी सदस्य के चुनाव लड़ने से पार्टी हाईकमान भी किनारा कर रही है। 

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...तो फिर कौन होगा शेखूपुर का प्रत्याशी?

बदायूं। अब सवाल ये है कि अगर सपा हिमांशु यादव को टिकट नहीं देगी तो किसे शेखूपुर से बतौर प्रत्याशी उतारेगी। तो यहां सबसे पहला नाम पूर्व मंत्री आबिद रजा का ही सामने आ रहा है। आबिद रजा को काफी समय पहले से ही बदायूं और शेखूपुर में से किसी एक जगह का दावेदार माना जा रहा है, लेकिन कुछ समय से उनकी शेखूपुर में बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत दे रही हैं कि उन्हें वहां से सपा का प्रत्याशी बनाया जाना लगभग तय हो चुका है। 

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ये हैं सपा के निवर्तमान विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष

बदायूं- ओमवीर सिंह

बिल्सी- किशोरी लाल शाक्य

दातागंज- सतीश यादव

शेखूपुर- अशोक यादव

सहसवान- नवाब सिंह

बिसौली- सुरेंद्र सिंह यादव

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परिसीमन के बाद दो बार सपा के बने विधायक

बदायूं। नया परिसीमन होने के बाद शेखूपुर जब अलग विधानसभा बनी तो सपा के आशीष यादव यहां से विधायक बने थे। दूसरी बार भाजपा के धर्मेंद्र शाक्य यहां से चुनाव जीते तो वर्तमान में आशीष यादव के बेटे हिमांशु यादव यहां से विधायक हैं। जातिगत समीकरण देखें तो यह सीट मुस्लिम और यादव बाहुल्य है। यानी सपा का मुस्लिम-यादव (एमवाई) समीकरण यहां फिट बैठता है। आबिद रजा की मुस्लिमों में अच्छी पकड़ है तो सपा के नाते यादवो का भी उन्हें पूरा साथ है। अन्य जातियों का समर्थन भी उन्हें मिलता दिखाई दे रहा है। 

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...तो क्या 'टोकन मनी' भी ली जा चुकी दावेदारों से 

बदायूं। सपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पार्टी के ही एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने शहर विधानसभा से चुनाव लड़ाने के लिए दो लोगों से 'टोकन मनी' भी ले ली है। इसके अलावा दातागंज के भी एक दावेदार से इसी प्रकार टोकन मनी लेने की बात सामने आई है। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि जिन लोगों से टोकन मनी ली गई है वह आर्थिक रूप से तो मजबूत हैं, लेकिन जनाधार के नाम पर शून्य से आगे नहीं बढ़ पाएंगे।  

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एक मुस्लिम और यादव को ही मिलेगा टिकट

बदायूं। इस चुनाव में यह बात भी निकलकर सामने आ रही है कि जिले की छह विधानसभाओं में से केवल एक पर मुस्लिम प्रत्याशी और एक पर यादव प्रत्याशी उतारा जाएगा। अन्य चार विधानसभाओं के प्रत्याशी अन्य बिरादरी के होंगे। माना जा रहा है कि इनमें शेखूपुर और सहसवान में ही यादव और मुस्लिम प्रत्याशियों का गणित सही बैठता है।

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सपा की ऐसी ही खबरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें-

- ..और जब शेखूपुर के लोग बोले- 'अपने ही वोटर को ठग लिया विधायक ने, जीत गए तो पलटकर तक नहीं देखा'

https://sabkibaat.in/post/---and-when-the-people-of-shekhupur-said--the-mla-cheated-his-own-voter-won-but-did-not-even-look-back-#google_vignette

- तीन मुस्लिमों को पीटने के मामले में कौन नेता साधना चाह रहा अपना राजनीतिक उल्लू...कहीं इस नेता की तरफ तो नहीं है विधायक का 'इशारा'

https://sabkibaat.in/post/which-leader-is-trying-to-make-political-profit-in-the-case-of-beating-of-three-muslims--is-the-mla-s--hint--towards-this-leader-

- बदायूं में सपा की 'ओवरहॉलिंग' की कवायद...फिलहाल सब को 'तोड़ा', जिलाध्यक्ष को छोड़ा

https://sabkibaat.in/post/sp-s-exercise-of--overhauling--in-badaun---for-now-everyone-has-been--broken--the-district-president-has-been-left-out-#google_vignette




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  • user by Anonymous

    कुशाग्र ko ही मिलेगा टिकट

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    कुत्ता साला

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    Is haramkhor ka hisab to uper wala hi karega। Neeche wale Kuch n kar payenge iska

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