तीन मुस्लिमों को पीटने के मामले में कौन नेता साधना चाह रहा अपना राजनीतिक उल्लू...कहीं इस नेता की तरफ तो नहीं है विधायक का 'इशारा'
भाजपा नेता तो मुंह पर ताले लगाए बैठे तो फिर सहसवान विधायक किस नेता की कर रहे बात
सपा विधायक ने कहा- कि कुछ लोग अपना राजनीतिक उल्लू साधना चाह रहे
सबकी बात न्यूज
बदायूं। रुदायन में तीन मुस्लिमों को पीटने के मामले में एक बार राजनीति और राजनेताओं को जनता के सवालों के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। फिर सामने आ गया है कि मामला कोई भी हो, ये नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने से बाज नहीं आते। इस मामले में भाजपाइयों के मुंह पर जहां ताला लगा हुआ है वहीं सपा के नेताओं की गुटबाजी एक बार फिर सामने आ गई है। सहसवान के सपा विधायक का बयान इसी गुटबाजी की तरफ इशारा कर रहा है।
राजनीति भी बड़ी दिलचस्प चीज है। यहां नेताओं का दिल पीड़ित का हाल देखकर कम, उसका धर्म देखकर ज्यादा दुखी होता है। अगर धर्म के साथ वोटबैंक का 'कॉम्बो पैक' मिल जाए, तो फिर संवेदनाएं 'प्रेस कॉन्फ्रेंस' के साथ 'लाइव टेलीकास्ट' होती हैं। रुदायन में हुई घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां भी कुछ नेता धर्म या वोटबैंक देखकर ही दुखी हुए।
तीन मुस्लिम लोगों को एक हिंदू युवक द्वारा पीटे जाने और उनकी टोपी उतरवाकर गालियां देने की खबर सामने आई, तो जाहिर है कि सियासी समीकरणों की गणित तुरंत एक्टिव हो गई। वीडियो वायरल होते ही यादव-मुस्लिम गठजोड़ को अपना स्थायी वोटबैंक मानने वाली सपा की संवेदनाएं जाग उठीं। नगर पालिका चुनाव के बाद खुद को सेक्युलर बताने वाले पूर्व विधायक आबिद रजा मैदान में उतर आए। पत्रकारों को बुलाया गया, घटना की निंदा की गई और अगले दिन पीड़ितों से मुलाकात के साथ मीडिया का जमावड़ा फिर लगा लिया।
ऐसे में बुद्धिजीवी ये भी कह रहे हैं कि इंसाफ का पहिया भले धीरे घूमे, लेकिन राजनीति का पहिया हर घटना पर फुल स्पीड में घूमता नजर आता है। यहां दर्द की गहराई नहीं, बल्कि उसके वोटों में बदलने की संभावना ज्यादा मायने रखती है।
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ब्रजेश यादव ने किसे कहा कि साधना चाह रहे अपना उल्लू
बदायूं। इस मामले में सपा विधायक ब्रजेश यादव ने जो बयान दिया, उसमें वह एक जगह कहते सुनाई दे रहे हैं कि जो लोग इसे कोई और एंगल देकर अपना राजनीतिक या कोई और उल्लू सीधा करना चाहते हैं, मेरी समाज के संभ्रात के लोगों से अपील है कि उनकी खामख्वाह की बातों पर ध्यान न दें। अब सवाल ये उठता है कि इस मामले में अब तक सपा और कांग्रेस नेताओं ने ही बयान दिए हैं। भाजपा के नेता तो मुंह पर ताला लगाकर बैठ गए हैं तो सपा विधायक का राजनीतिक उल्लू साधने का इशारा किस तरफ है। जिले की राजनीति की समझ रखने वाले सभी जानते हैं कि सपा भी जिले में गुटबाजी का शिकार है। एक गुट जिलाध्यक्ष आशीष यादव, उनके बेटे और शेखूपुर के विधायक हिमांशु यादव और सहसवान विधायक ब्रजेश यादव का माना जाता है तो दूसरी ओर सपा के अन्य नेता शामिल हैं। ऐसे में राजनीति के जानकारों का तो यही कहना है कि सहसवान विधायक ने बातों ही बातों मे यह निशाना पूर्व विधायक आबिद रजा पर ही साधा है क्योंकि इस मामले में अब तक सबसे ज्यादा बयान उन्हीं ने दिए हैं।
(देखें वीडियो) -
आरोपित का फोटो हुआ वायरल तो सपा विधायक ने दी सफाई
बदायूं। इधर जब आबिद रजा की पत्रकारों से हुई बात की वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई तो लोगों ने एक फोटो कमेंट सेक्शन में डालना शुरू कर दिया, जिसमें आरोपित अक्षय शर्मा सहसवान विधायक ब्रजेश यादव के साथ सेल्फी लेता नजर आ रहा है। फोटो वायरल हुआ तो विधायक ने सफाई दी कि वह आरोपित को नहीं जानते और यह फोटो साल 2021 का है, जब वह विधायक नहीं थे।

प्रभात फेरी में पिटे लोग तो भाजपाइयों ने आंसू बहाए, सेक्युलर नेता कहीं नजर नहीं आए
बदायूं। लोगों के जेहन में अभी भी इस्लामनगर में प्रभातफेरी निकालने वाले लोगों की पुलिस द्वारा पिटाई का मामला विस्मृत नहीं हुआ होगा। मामला हिंदुओं का था तो भाजपा के नेता और जनप्रतिनिधि वहां ऐसे दुख जताने पहुंच गए थे, मानों उन पर दुखों का पहाड़ टूट गया हो, लेकिन खुद को सेक्युलर नेता बताने वाले पूर्व विधायक आबिद रजा तब कहीं नजर नहीं आए थे।
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गुटबाजी का नमूना ये भी...तो क्या आबिद ने सांसद पर कसा तंज
बदायूं। इस मामले में सांसद आदित्य यादव ने एक्स पर ट्विट कर घटना की निंदा की थी। इधर जब पत्रकारों ने पूर्व विधायक आबिद रजा से इस बाबत पूछा कि सांसद तो केवल एक्स पर ट्विट करके रहे गए तो आबिद रजा ने कहा कि 'एक्स पर खेलना तो अब शॉर्टकट शौक हो गया है। कौन क्या कहता है कौन क्या बयान देता है और कौर करता है, इसमें बड़ा फर्क है। बयान देना बड़ा आसान है, लगकर चिपककर मदद करना बहुत मुश्किल है।'
(देखें वीडियो) -
कांग्रेसियो ने पिटने वालों को पहनाई माला
बदायूं। सपा नेताओं की बयानबाजी से इतर कांग्रेस भी इस मामले में कूदी तो दो कदम आगे आकर कांग्रेसी पीड़ितों को माला पहनाने पहुंच गई। उनका स्वागत ऐसे किया गया, जैसे कोई बड़ा काम हो गया हो। इसकी भी खासी चर्चा हो रही है।

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