उझानी मेंथा फैक्ट्री कांडः सपाइयों ने जात और वोटबैंक देखकर 'मरहम' लगाया...भाजपाइयों को तो वो भी नजर नहीं आया
खरी-खरी-
मृतकों के परिवार वालों का हाल-चाल लेने और आर्थिक सहायता देने पहुंचे सपा नेता, पर उन्होंने भी यादव बिरादरी और विधानसभा क्षेत्र देखकर चुना घर
इस्लामनगर में प्रभातफेरी में पुलिस की मारपीट में हुए घायलों के यहां तो पहुंच गए, पर मेंथा फैक्ट्री में तीन मर गए और भाजपाइयों के आंसू नहीं निकले
सबकी बात न्यूज
बदायूं। यह राजनीति है और ये राज(अ)नीति करने वाले(अभि)नेता हैं। ऐसे(अभि)नेता, जिसकी सहानुभूति भी बिरादरी और उससे जुड़ा फायदा देखकर होती है तो मृतकों को आर्थिक सहायता भी जेब से तब निकलती है, जब सामने वाला पीड़ित उन्हें अपना वोट बैंक नजर आता है। उझानी मेंथा फैक्ट्री में पहले हुए अग्निकांड और दूसरी बार तीन लोगों की मौत का मामला ऐसे नेताओं की दिखावटी सहानुभूति का सबसे बड़ा उदाहरण है। सपाइयों ने तो बिरादरी और विधानसभा क्षेत्र देखकर पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगा भी दिया, पर भाजपा के नेताओं ने तो किसी मृतक के यहां जाना तक मुनासिब नहीं समझा।

उझानी की भारत मिंट केमिकल मेंथा फैक्ट्री में तीन लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस और प्रशासन इसे हादसा बता रहे हैं तो मृतकों के परिवार वाले इसे सुनियोजित हत्या कह रहे हैं। सच्चाई जो भी हो, लेकिन इस घटना ने एक बाद फिर बदायूं जिले की राजनीति और यहां के नेताओं की छवि पर एक सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।
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अब जानिये कौन हैं मृतक और किस विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले
बदायूं। इस घटना में जोगेंद्र, विवेक और भानु की मौत हुई थी। तीनों ही यादव बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। जोगेंद्र यादव बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के गांव बसावनपुर का रहने वाला था तो विवेक यादव कादरचौक के गांव पसेई का रहने वाला था। यह गांव शेखूपूर विधानसभा क्षेत्र में आता है। तीसरा मृतक वीरभान उर्फ भानु यादव मूसाझाग क्षेत्र के मुड़सेना खुर्द का था जो विधानसभा क्षेत्र में आता है।
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अब पढ़िए, समाजवादी पार्टी के नेताओं की हमदर्दी का 'गणित'
बदायूं। मरने वाले तीनों यादव बिरादरी से ताल्लुक रखते थे। ऐसे में सपाइयों की हमदर्दी उमड़ना लाजिमी है। चूंकि सपा हमेशा से ही एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण से ही चुनाव लड़ती और जीतती आई है तो सपा नेताओं की हमदर्दी मृतकों के साथ दिखना भी सामान्य है। सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव हो या सहसवान विधायक ब्रजेश यादव, पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव हों या कैप्टन अर्जुन यादव, सभी का रुख मृतकों के घर की तरफ हो गया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव भी यादव होने के नाते जोगेंद्र के घर पहुंचे।
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अब जानिये, आर्थिक सहायता का 'अर्थशास्त्र'
बदायूं। 'सबकी बात' न्यूज की जानकारी के अनुसार, इस कांड में मृतकों के परिवार वालों के लिए अब तक पूर्व विधायक आबिद रजा समेत सपा के राष्ट्रीय सचिव योगेंद्र तोमर नें आर्थिक सहायता दी है लेकिन पूर्व विधायक आबिद रजा जहां मृतक विवेक यादव के घर पहुंचे तो योगेंद्र सिंह ने जोगेंद्र के घर जाकर आर्थिक सहायता प्रदान की। पूर्व विधायक आबिद रजा जिस विवेक यादव के यहां पसेई गांव पहुंचे, वह

- मृतक विवेक के यहां पहुंचे पूर्व विधायक आबिद रजा (फाइल फोटो)-
विधानसभा शेखूपुर में आता है और सभी जानते हैं कि आबिद रजा इस बार सपा से बदायूं या शेखूपुर से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में हैं। सपा के राष्ट्रीय सचिव योगेंद्र पाल सिंह जोगेंद्र के यहां बसावनपुर गए जो बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में है। सूत्रों के अनुसार, योगेंद्र सिंह इस बार बिल्सी से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी

- मृतक के यहां पहुंचे सपा नेता योगेंद्र सिंह (फाइल फोटो)-
कर रहे हैं। इसके अलावा जिस दिन सहायता दी गई, उसी दिन उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल करवा दिया गया ताकि 'हमदर्दी का ये मरहम' जनता की नजरों में भी आ सके। अब, इन दोनों नेताओं की आर्थिक सहायता दोनों अन्य मृतकों के परिवार वालों तक क्यों नहीं पहुंची, यह सब जानते हैं।
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जहां मौत का सन्नाटा वहां भाजपाई...'खामोश'
बदायूं। इस मामले में सबसे ज्यादा अजीब लगने वाली बात है, भाजपा नेताओं की चुप्पी। तीनों मृतकों के घर पर आज तक कोई भाजपा का नेता नहीं पहुंचा जबकि यही भाजपा नेता पिछली बार फैक्ट्री में आग लगने पर फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल के यहां ऐसे दुख जताने पहुंच गए थे जैसा उनका खुद का घर जल गया हो। पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव को छोड़ दें तो अन्य किसी भाजपाई ने मृतक मुनेंद्र के यहां जाने की जरूरत नहीं समझी थी। गौर करने वाली बात ये भी है कि भाजपा के यही नेता और विधायक पिछले दिनों इस्लामनगर में प्रभातफेरी के दौरान पुलिस की पिटाई से घायल लोगों के घरों तक नेतागिरी करने पहुंच गए, लेकिन फैक्ट्री में मरे लोगों के घरों में गूंजती हुई परिवार वालों की चीखें उनके कानों तक नहीं पहुंचीं।
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फैक्ट्री मालिक भाजपा नेताओं का करीबी तभी तो...
बदायूं। उझानी की भारत मिंट केमिकल मेंथा फैक्ट्री का मालिक मनोज गोयल भाजपा नेताओं का करीबी है। यह उसकी फेसबुक आईडी को देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि किस-किस भाजपा नेता का उसे संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन उस पर कार्रवाई करने से हिचक रहा है तो यह लाजिमी भी है।
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...तो क्या बड़े नेता की 'नाराजगी' का डर
बदायूं। मेंथा फैक्ट्री में हुई तीन लोगों की मौत के मामले में भाजपा के एक बड़े केंद्रीय स्तर के स्थानीय नेता पर आरोप लग रहे हैं कि फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल पर उनका हाथ है। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि भाजपा के विधायकों समेत अन्य नेताओं पर कहीं यह दबाव तो नहीं कि अगर कहीं वे मृतकों के घर जाते हैं तो उन्हें बड़े वाले नेताजी की नाराजगी न झेलनी पड़ जाए। दबी जुबान लोग यह भी कह रहे हैं कि पिछले साल सील हुई फैक्ट्री भी इन्हीं नेताओं के संरक्षण में अवैध रूप से चल रही थी।
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