उझानी मेंथा फैक्ट्री कांडः आखिर मैनेजर क्यों बार-बार कह रहा था सो जाने को...क्या किसी प्लानिंग का हिस्सा था ये!
फैक्ट्री के मैनेजर राकेश की रिकॉर्डिड ऑडियो के आधार पर परिवार वाले कर रहे किसी साजिश की तरफ इशारा
एक मृतक का भाई बोला- मैनेजर ने फोन करके धमकाया
सबकी बात न्यूज
बदायूं। उझानी मेंथा फैक्ट्री में तीन लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों की मौत का कारण भले ही धुंए से दम घुटना घोषित कर दिया हो, लेकिन मृतकों के परिवार वाले अभी भी इसे संदिग्ध मान रहे हैं। परिवार वालों की मानें तो उन्हें अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक नहीं दी गई है। परिवार वालों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद फैक्ट्री का मैनेजर उन्हें धमका रहा है।
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ये है मामला
बदायूं। उझानी थाना क्षेत्र के गांव कुड़ा नरसिंहपुर स्थित भारत मिंट केमिकल लिमिटेड फैक्ट्री के मालिक मनोज गोयल हैं। फैक्ट्री में 30 वर्षीय जोगेंद्र यादव, 25 वर्षीय भानु और 27 वर्षीय विवेक यादव काम करते थे। 13 जनवरी को उनके शव फैक्ट्री गेट पर बने केबिन में उल्टी सीधी हालत में पड़े मिले थे। बात फैली तो पुलिस के एक आला अधिकारी ने स्वघोषणा कर दी कि धुंए के कारण तीनों का दम घुट गया

और उनकी मौत हो गई। परिवार वालों ने इसका विरोाध किया, जिस पर काफी हंगामा भी हुआ। हालांकि देर शाम आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का यही कारण बताया गया, लेकिन परिवार वाले इसे नहीं मान रहे। उनकी मानें तो तीनों युवकों की मौत एक सुनियोजित साजिश है। मृतक जोगेंद्र के परिवार वालों की तहरीर पर पुलिस ने फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल, उनके भाई नितेश गोयल और फैक्ट्री मैनेजर राकेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
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आरोप- 'न पूछताछ, न सही जांच, धमका रहा मैनेजर'
बदायूं। घटना के बाद मृतकों के परिवार वाले चीख चीखकर कह रहे हैं कि उन्हें इस बात का भरोसा नहीं है कि तीनों की मौत धुएं से दम घुटने के कारण हुई है। उन्हें तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं दी गई। विवेक के भाई हरवेश के अनुसार, हादसे के बाद किसी भी अधिकारी ने उनसे आज तक संपर्क नहीं किया। आरोपितों से पूछताछ तक
करने की जहमत पुलिस ने नहीं उठाई। वे खुलेआम घूम रहे हैं। उनके पास ऐसे ऑडियो व वीडियो हैं जो हत्या की तरफ इशारा करते हैं। उनके अनुसार, फैक्ट्री में कुछ न कुछ तो गलत और अवैध हो रहा था। इस घटना की मजिस्ट्रेटी जांच होनी
चाहिए। जोगेंद्र के भाई ने तो यहां तक कहा कि घटना के बाद मैनेजर राकेश उन्हें धमका रहा है। परिवार के एक व्यक्ति के पास उसका फोन आया था कि घर से उठवा लूंगा।
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अब जानिये क्या है ऑडियो में, जिस पर परिजन आशंकित
बदायूं। मृतक जोगेंद्र के परिवार वालों के पास कुछ ऑडियो हैं। उनके अनुसार, यह बातचीत घटना से एक दिन पहले की है, जिसमें मैनेजर राकेश और जोगेंद्र की बात हो रही है। इसमें मैनेजर जोगेंद्र से सो जाने की बात पर ज्यादा जोर देता सुनाई दे रहा है। पहली बार मैनेजर उससे कह रहा है कि 12 बजे तक सो जा। दूसरी ऑडियो में मैनेजर पूछ रहा है कि रात में बाहर निकलते हो, कितने बजे। इस पर जोगेंद्र कहता है कि रात में इकठ्ठे निकलते हैं। फिर मैनेजर पूछ रहा है कि कितने आदमी हो वहां। इस पर जोगेंद्र कहता है कि मैं हूं, भानु और विवेक हैं।
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आखिर क्या है वो... 'माल'
बदायूं। ऑडियो में मैनेजर जोगेंद्र से किसी 'माल' के बारे में बात कर रहा है। वह जोगेंद्र से पहले चन्दौसी जाने की बात कहता है वहां से माल उठाकर रामपुर जाने और फिर उझानी वापस आने की बात कह रहा है। मैनेजर यह भी कहता सुनाई दे रहा है कि फैक्ट्री से माल का बिल जाएगा। अब सवाल ये है कि ये 'माल' क्या है। जब अग्निकांड के बाद फैक्ट्री सील कर दी गई थी तो 'माल' कैसे, क्यों और कहां जा रहा था।
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सील थी फैक्ट्री तो कैसे चल रहा था काम
बदायूं। इस फैक्ट्री में पिछले साल भीषण आग लगी थी, जिसमें एक मजदूर की जलकर मौत हो गई थी। कई दिनों तक उसके शव का पता ही नहीं चला था, जिसके बाद काफी हंगामा और राजनीति हुई थी। उसके बाद मामले में लीपापोती कर दी गई। हालांकि चर्चा ये थी कि मौतें तो कई की हुई थीं लेकिन बाहर राज्यों के मजदूर होने के कारण मामला दबवा दिया गया। इसके बाद फैक्ट्री सील कर दी गई थी। उसकी नीलामी भी होनी थी, लेकिन फिर भी अंदर काम वैसे ही चल रहा था। घटना वाले दिन की तारीख के ड्रम इस बात के गवाह हैं।
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