उझानी मेंथा फैक्ट्री कांडः कोई नहीं आया बयान दर्ज कराने....अब 'चैप्टर क्लोज', तो क्या यही होना है इस मामले में ?
प्रशासन ने 24 जनवरी तक दिया है बयान दर्ज कराने का समय, पर परिवार वालों का इसका पता तक नहीं
परिवार वालों के अनुसार, आज तक कोई अधिकारी नहीं आया मिलने, न ही जानकारी दी
बदायूं। ये सिस्टम ऐसा ही है। रसूखदारों के रसूख के नीचे गरीब और मजलूमों की आवाज 'तूती' बन जाती है। समझ तो गए ही होंगे, सुना भी होगा ये मुहावरा 'नक्कारखाने में तूती की आवाज'। यानी समर्थ के सामने असमर्थ की कौन सुनता है। बस यही हो रहा है उझानी की भारत मिंट केमिकल मेंथा फैक्ट्री में तीन लोगों की मौत के मामले में। परिवार वाले चिल्ला चिल्लाकर कह रहे हैं कि वे पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं लेकिन न तो पुलिस पर प्रभाव है न प्रशासन पर।

प्रशासन ने इस मामले में 24 जनवरी तक बयान दर्ज कराने को कहा है। प्रशासन के अनुसार, मृतकों के परिवार वालों समेत कोई भी व्यक्ति इस मामले में बदायूं आकर अपने बयान दर्ज करा सकता है, लेकिन मृतकों के परिवार वालों की मानें तो उन्हें इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई। न तो किसी अधिकारी ने उन्हें इस बाबत बताया और न ही कोई साक्ष्य देने को कहा गया। जोगेंद्र के पिता रामबहादुर के अनुसार, लिखित सूचना तो दूर, इस बारे में मौखिक तक बताने कोई अधिकारी नहीं आया।
अब इसके पीछे क्या कारण हो सकता है! क्या प्रशासन इस मामले को दबाना चाहता है? क्या 24 जनवरी तक किसी के न आने पर इस चैप्टर को यही क्लोज करने की मंशा तो अधिकारियों की नहीं है? क्या इसके बाद परिवार वालों की सुनी जाएगी? ऐसे तमाम सवाल हैं जो लोगों के मन में न केवल कौंध रहे हैं बल्कि प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
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आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला
बदायूं। मृतकों के परिवार वाले सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव के साथ विगत सोमवार को एसएसपी से मिले थे। उन्हें एसएसपी ने जांच का आश्वासन दिया था लेकिन आज तक क्या जांच हुई, उन्हें इस बारे में आज तक अवगत नहीं कराया गया। जांच का केवल आश्वासन दिया गया। परिवार वालों के अनुसार, पुलिस और प्रशासन फैक्ट्री मालिक के दबाव में आकर काम कर रहा है। सबकी मिली भगत है, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं नजर आ रही है।
(मुख्य फोटो- फाइल)
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