हर जगह पुलिस जनता की मददगार...पर यहां तो वह भी मदद की 'तलबगार'

हर जगह पुलिस जनता की मददगार...पर यहां तो वह भी मदद की 'तलबगार'

रोडवेज के जाम में फंसी पुलिस की गाड़ी तो निकलवाते दिखाई दिए दो राहगीर

बदायूं। कभी-कभी एक तस्वीर कुछ ऐसा कह देती है, जो हजार शब्द मिलकर भी नहीं कह पाते। इस खबर की मुख्य तस्वीर को ध्यान से देखिये तो माजरा समझ में आ जाएगा। पुलिस को जहां हर मामले में जनता की मददगार कहा जाता है, वहीं रोडवेज बस स्टैंड के सामने लगने वाले जाम में यह पुलिस भी लाचार साबित होते हुए मदद की तलबगार बन जाती है। 

जहां आम जनमानस को ट्रैफिक पुलिस का रोल निभाते हुए सड़क पर जाम में फंसी पुलिस की गाड़ी को ट्रैफिक से निकलवाने में पुलिस की ही मदद करनी पड़े,तो वहां की ट्रैफिक व्यवस्था का अंदाजा आप स्वयं ही लगा सकते हैं।

शहर के रोडवेज बस स्टैंड के सामने रोडवेज से जिला एवं महिला चिकित्सालय को जाने वाले मार्ग पर रोडवेज तथा प्राइवेट बसों के चालकों की मनमानी के चलते हर

समय जाम लगा रहना एक आम बात सी होकर रह गई है। दिन में यहां एक बार नहीं, कई-कई बार जाम लगता है। रोडवेज एवं प्राइवेट बसों के चालक अपनी-अपनीगाड़ियों में सवारियां भरने के चक्कर में मनमाने तरीके से बसों को आड़ा-तिरछा करके खड़ा कर देते हैं, जिससे यहां हर समय जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। जाम के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

बृहस्पतिवार को यहां पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसे देखकर तमाम लोग भी व्यंग्य करने से नहीं चूके। दरअसल, इस जाम में पुलिस की भी एक गाड़ी फंसा गई, जिसे सड़क पर चल रहे दो राहगीर जाम से निकलवाते दिखे। 

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चालकों की मनमानी जनता पर भारी

बदायूं। रोडवेज और प्राइवेट बसों के चालकों समेत डग्गामार वाहन वालों की मनमानी इस समस्या की प्रमुख जड़ है, जिससे हलकान आम जनता को होना पड़ता है। सालों पुरानी इस समस्या को निपटाने के दावे तो अधिकारी हजार बार कर चुके हैं, लेकिन आज तक इसका निराकरण नहीं हो सका। 

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पुलिस, रोडवेज और डग्गामार वाहन चालकों का 'गठजोड़'

बदायूं। रोडवेज बस स्टैंड के सामने जाम की यह समस्या रोडवेज के ही कुछ चालक पैदा करते हैं तो प्राइवेट बस और डग्गामार वाहनों के चालक इस कोढ़ में खाज का काम करते हैं। पुलिस की भी इसमें मिलीभगत शामिल है। बताया तो यहां तक जाता है कि रोडवेज पुलिस चौकी का इन डग्गामार वाहन चालकों से महीना बंधा है और एक निश्चित रकम केवल इसी बात की होती है कि इन वाहनों पर केवल डंडा फटकारने के अलावा कोई और दूसरा काम न किया जाए। 

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  • user by जतिन यादव

    पीडीए का प्रचार कर रहे हैं या अपना। पूरा जिले में कहा प्रचार हो रहा है बस शेखुपुरा में हो रहा है

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  • user by Anonymous

    Rt bhie

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  • user by श्रीकांत यादव

    दल बदलू नेता हैं ये, किसी का भला नहीं कर सकते हैं ये। टिकट का सपना देख रहे हैं कई नेता पर टिकट नहीं मिलेगा। आबिद रजा काजी रिजवान शैलेश पाठक, विमल कृष्ण सब ताकते रह जाएंगे

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