मॉडल्स की भर्ती के नाम पर बुलाई जाती थीं लड़कियां...फिर बनाई जाती थी पोर्न वीडियो
सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर होती थी मॉडल्स की भती
फ्लैट में बना रखा था स्टूडियो, पोर्न वीडियो होती थीं शूट
ईडी ने मारा छापा तो मामला पकड़ा
नोएडा। ईडी ने नोएडा में एक फ्लैट में छापा मारकर पार्नोग्राफी कराने वाला रैकेट पकड़ा है। पति-पत्नी मिलकर ये रैकेट चला रहे थे। ये दोनों पोर्न साइटों को वीडियो उपलब्ध कराते थे। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर मॉडल्स की भर्ती की जाती थी और फिर युवतियों को रुपये का लालच देकर उनसे पोर्न वीडियो की शूटिंग कराई जाती थी।
नोएडा में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पोर्न वीडियो बनाने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यहां एक फ्लैट में रहने वाले उज्जवल किशोर और नीलू श्रीवास्तव पिछले पांच साल से यह रैकेट चला रहे थे। यह दोनों आपस में पति-पत्नी हैं। बताते हैं कि ये रैकेट फेसबुक के जरिए विज्ञापन देकर मॉडल्स की भर्ती करते थे। युवतियों को मॉडलिंग करके अच्छे पैसे कमाने का लालच दिया जाता था। दिल्ली-एनसीआर की कई लड़कियों ने इन विज्ञापनों के जरिए दंपती से संपर्क किया था।
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फ्लैट में मिलता था पोर्न वीडियो में काम करने का ऑफर
नोएडा। बताते हैं कि जब लड़कियां ऑडिशन के लिए फ्लैट में पहुंचती थीं तो उन्हें पोर्न रैकेट का हिस्सा बनने का प्रस्ताव दिया जाता था। आरोपित दंपती लड़कियों को एक से दो लाख रुपये महीने कमाने का लालच देते थे। कई लड़कियां पैसे के लालच में आकर इस रैकेट का हिस्सा बन भी गईं। बताते हैं कि ईडी की जांच में 15.66 करोड़ रुपये की अवैध विदेशी फंडिंग का खुलासा हुआ है।
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पैसे के हिसाब से तय होती थी नग्नता
नोएडा। बताते हैं कि जब इन लड़कियों की वीडियो शूट की जाती थी तो उन्हें कितना नग्न होना है, उसका निर्धारण पैसे के हिसाब से होता था। यानी कस्टमर जितना पैसा भेजता था उसी के हिसाब से लड़कियां एक्ट करती थीं। इनमें हाफ फेस शो (जहां चेहरा आधा दिखता था), फुल फेस शो (जहां पूरा चेहरा दिखता था) और न्यूड कैटेगरी (जिसमें पूरी तरह नग्नता होती थी) के मानक तय किए गए थे। बताते हैं कि कमाई का 75 प्रतिशत हिस्सा पति-पत्नी के पास जाता था, जबकि 25 प्रतिशत हिस्सा लड़कियों को दिया जाता था।