“महुआ डाबर”  की कहानीः मोहम्मद अंसारी की जुबानी

“महुआ डाबर” की कहानीः मोहम्मद अंसारी की जुबानी

ऑनलाइन हुआ आयोजन, जाने माने शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने लिया भाग

सबकी बात न्यूज। महुआ डाबर म्यूजियम एवं डॉ. जनक सिंह सामाजिक-सांस्कृतिक शैक्षिक संस्था, बरेली के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक भूले-बिसरे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय पर केंद्रित वेबिनार “महुआ डाबर की कहानीः मोहम्मद अंसारी की जुबानी” सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह आयोजन रविवर को दोपहर 12 बजे ऑनलाइन ज़ूम प्लेटफ़ॉर्म पर आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इतिहास-शोधकर्ता एवं महुआ डाबर के उन्नायक मोहम्मद अब्दुल लतीफ अंसारी रहे, जिन्होंने न केवल अपने पुरखों की स्मृति को जीवित किया, बल्कि 1857 के समय अंग्रेजों द्वारा तहस-नहस किए गए महुआ डाबर गांव को ऐतिहासिक मानचित्र पर पुनः प्रतिष्ठित किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ उनका मिशन नहीं था। ये उन हज़ारों मासूम जनों की आवाज़ है जिन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली। जब उन्होंने अपने पिता से ‘महुआ डाबर’ के विषय में सुना जो आज कहीं नहीं है, उसी दिन ठान लिया था कि उस मिट्टी को फिर से पहचान दिलाएंगे। 

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मोहम्मद अंसारी की बात पढ़िए, क्या कहा उन्होंने

- जब मैं 1994 में पहली बार उस जगह पहुंचा, तो वहां सिर्फ खेत थे, पर ज़मीन बोलती थी। मस्जिदों के जले अवशेष, मिट्टी में दबे खंडहर और गांववालों की स्मृति ने रास्ता दिखाया। ये सफ़र मुश्किल था, पर हर सबूत ने मुझे यकीन दिलाया कि इतिहास में न्याय अब भी संभव है।

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ये भी बताया मो. अंसारी ने

- उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. अनिल सिंह के सहयोग से खुदाई करवाई और सैकड़ों वर्षों की चुप्पी को ऐतिहासिक तथ्य में परिवर्तित कर दिया।

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इनका रहा सहयोग व मौजूदगी

- इस संवाद श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण परंतु विस्मृत गांव महुआ डाबर के ऐतिहासिक सत्य को उजागर करना और शोध की नई दिशाओं को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में दी गई जानकारियां न केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अमूल्य रहीं, बल्कि विद्यार्थियों और अध्येताओं को प्रेरणादायक भी सिद्ध हुईं। कार्यक्रम का संचालन डॉ दीपक सिंह द्वारा किया गया। स्वागत-परिचय डॉ. सीमा गौतम ने प्रस्तुत किया और समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आदित्य सिंह द्वारा किया गया।  

इस अवसर पर देश भर के शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें प्रो. अनिल कुमार, प्रो. मनोज पांडे, डॉ. शालीन सिंह, डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री, डॉ. अभिषेक पांडे, डॉ. धर्मेंद्र सिंह डॉ. शाह आलम, प्रसेनजीत कृतांत, डॉ. कल्पना, सागर सत्यार्थी व अन्य शामिल रहे। 


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  • user by Anonymous

    बदायूं के भाजपाई चोर हैं

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  • user by Anonymous

    ये अनमोल डॉक्टर डोनेशन वाला है। ये और इसका बाप दोनों haraami है

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  • user by SAB KI BAAT

    Good

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