इन गायों के शरीर से 'झांकती' हड्डियों और गोशालाओं की दुर्दशा देखिए...'योगीराज' में ये हाल है तो...
ग्राम सतेती की गोशाला पर उठे सवाल, गायों की मौत और तस्करी के आरोप
एक ग्रामीण ने प्रशासन को शिकायती पत्र देखकर व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल, आइना दिखाने का भी प्रयास
बदायूं। योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में भले ही गोवंशीय पशुओं को आश्रयस्थलों पर रखकर उनका पूरा ध्यान रखने के निर्देश दिए जा रहे हों लेकिन असलियत यही है कि न तो गायों का ध्यान रखने वाला कोई है और न ही गोशालाओं का। गाय और गोशालाएं दोनों भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ रही हैं। बिल्सी के गांव सतेती से एक और ऐसा ही मामला सामने आया है जब एक ग्रामीण ने डीएम और एसएसपी को पत्र भेजकर न केवल व्यवस्थाओं पर सवाल उठाया है बल्कि कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
मामला बिल्सी क्षेत्र के गांव सतेती की ग्राम पंचायत इन्छा की गोशाला का है। गांव निवासी बालिस्टर सिंह ने डीएम को भेजे पत्र में का है कि गांव में बनी गोशाला के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग ही यहां भ्रष्टाचार कर रहे हैं। गोशाला में रखी गायों की हालत बेहद खराब है। उन्हें न तो मानक के अनुरूप चारा दिया जाता
है और न ही पीने का स्वच्छ पानी। और तो और, बीमार होने पर उनकी इलाज की व्यवस्था भी नहीं होती। कमजोर और बीमार गायें धीरे-धीरे मर जाती हैं, मगर उनका पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता ताकि मरने की वजह सामने न आ सके।
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दावा-तस्करों को बेच दी जाती हैं मृत गायें
बदायूं। शिकायतकर्ता का दावा है कि मृत गायों को गुप्त रूप से तस्करों को बेचा जाता है, और उनकी जगह नई छुट्टा गायों को पकड़कर सरकारी रिकॉर्ड में संख्या बढ़ा चढ़ाकर दिखाते हुए अनुदान का गबन किया जाता है। इसके अलावा, जो दुधारू गायें अच्छी नस्ल की होती हैं, उन्हें ये जिम्मेदार ग्राहकों या पशु व्यापारियों को ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। गोवंश द्वारा प्राप्त गोबर की खाद का प्रयोग भी इन लोगों द्वारा निजी लाभ के लिए किया जाता है।
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अधिकारियों पर लगाए मिलीभगत के आरोप
बदायूं। बालिस्टर सिंह ने कहा है कि यह सब विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही संभव हो पा रहा है क्योंकि वो शिकायतों को दबा देते हैं। इसी वजह से आरोपित लोग बेखौफ होकर गायों के संग क्रूरता और भ्रष्टाचार का खेल 
चला रहे हैं। अधिकारियों के रवैय्ये से ग्रामीणों में भी डर का माहौल है क्योंकि आरोपित लोग गायों की दुर्दशा का विरोध करने वालों को झूठे मुकदमों में फंसाने और जान-माल की हानि की धमकी देते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यह मामला पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत संज्ञेय अपराध है, अतः इस पर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।
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फोटो में दिख रही गायों और गोशालाओं की दुर्दशा
बदायूं। शिकायतकर्ता ने कुछ फोटो भी जारी किए हैं। दावा किया जा रहा है कि यह इसी गोशाला के हैं। इन फोटो में गायों और गोशाला दोनों की दुर्दशा साफ दिखाई दे रही है। गायों की हड्डियां तक निकली दिखाई दे रही हैं। साथ ही गोशाला में भीषण गंदगी भी साफ दिख रही है।
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