केवल खुराना स्मृति मंच द्वारा किया गया प्रथम वार्षिक आयोजन, गुरुद्वारा हॉल में हुआ कार्यक्रम
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बदायूं। केवल खुराना स्मृति मंच द्वारा प्रथम भावपूर्ण वार्षिक आयोजन गुरुद्वारा हॉल जोगीपुरा में सम्पन्न हुआ, जिसमें जनपद के साहित्यिक, सामाजिक और राजनैतिक व्यक्ति एकत्र हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मनीराम मिश्र ने की। दीप प्रज्जवलन के उपरान्त सरस्वती वंदना कुमार आशीष द्वारा पढ़कर कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। सदर विधायक महेश चन्द्र गुप्ता ने कहा कि आम आदमी की स्मृति नहीं संजोई जाती। स्मृतियां तो विशिष्ट व्यक्तित्वों की ही संजोई जाती हैं। केवल खुराना एक सजग और त्वरित प्रभावशाली निर्णय लेने के लिए सुविख्यात अधिकारी थे।
दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि उनका साहित्यकार अशोक खुराना के परिवार से पुराना आत्मीय परिचय है। उनके पुत्र केवल खुराना जो शिशु मन्दिर के होनहार छात्र रहे, ने उच्चतम आयामों तक पहुंचकर जनपद का नाम रौशन किया।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि वह ऐसे पुलिस अधिकारी थे जो जड़ो से जुड़े हुए थे और अपने कर्तव्य के साथ-साथ सामाजिक संवेदनाओं से भी परिपूर्ण थे। वरिष्ठ अधिवक्ता अनवर आलम ने कहा कि वह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था थे।
डॉ. शैलेन्द्र कबीर ने एक दोहा समर्पित करते हुए कहा--
अल्प समय में छोड़कर, अपनी अद्भुत छाप।
श्री राघव के धाम में, चले गए हैं आप।।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि--
जो केवल खुद को जीते हैं, वे ज्यादा दिन कब जीते हैं !
जो औरों के हित जीते हैं, वे मरकर के भी जीते हैं।।
कार्यक्रम अध्यक्ष मनीराम मिश्र ने कहा कि केवल खुराना के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक पुस्तक भी बननी चाहिए जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक होगी।
इसके अतिरिक्त डॉ. रामबहादुर व्यथित, डॉ. रामप्रकाश पथिक, नरेन्द्र गरल, महेश मित्र, डॉ. गीतम सिंह, अरविन्द धवल, भूराज लायर, दीपांकर गुप्त, भारत शर्मा, आबशार आदम, कमला महेश्वरी तथा डॉ. मनवीर सिंह ने भी अपनी भावांजलि प्रस्तुत की। कार्यक्रम में जगदीश धींगड़ा, रामप्रकाश शास्त्री, विष्णुदेव चांडक्य, शरद शंखधार, सचिन भारद्वाज, वेदभानु आर्य, परविन्दर प्रताप सिंह, डायना अहलूवालिया, प्रतिभा मिश्रा, डॉ. मधु गौतम, अशोक सक्सेना, वीरेन्द्र झा, अमृत गांधी, डीके चड्डा, विष्णु असावा, अशोक नारंग, सरदार रूपेन्द्र सिंह, राजन सिंह, बिन्नी सक्सेना, राजेश सक्सेना, मुनेन्द्र सक्सेना आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कामेश पाठक तथा सुनील समर्थ ने संयुक्त रूप से किया। अंत में विवेक खुराना ने सबका आभार व्यक्त किया।


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